देश-विदेश

ईरान में तख्तापलट की तैयारी? ट्रंप और रजा पहलवी के बयानों ने बढ़ाई हलचल

वॉशिंगटन (एजेंसी)। वॉशिंगटन और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी के हालिया बयानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि ईरान की वर्तमान सरकार के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार की जा रही है।

ट्रंप की चेतावनी : ‘प्रदर्शन जारी रखें, हम साथ हैं’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन करते हुए उन्हें अपने हक के लिए डटे रहने को कहा है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया या हिंसा की, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। ट्रंप ने कहा कि निर्दोष लोगों पर अत्याचार करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।

राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों से आह्वान किया कि वे सरकारी संस्थानों पर अपना नियंत्रण स्थापित करें। साथ ही, उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ तब तक सभी बैठकें रद्द करने की घोषणा की है जब तक कि हिंसा पूरी तरह रुक नहीं जाती।

रजा पहलवी का संदेश: ‘मदद बस पहुंचने वाली है’

दशकों से अमेरिका में रह रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के सुर भी पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप से मिलते-जुलते हैं। उन्होंने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। पहलवी ने ट्वीट के जरिए संकेत दिया कि बाहरी मदद जल्द ही उन तक पहुंचने वाली है।

उन्होंने ईरान की राष्ट्रीय सेना को भी एक कड़ा संदेश दिया है:

सेना की भूमिका: पहलवी ने कहा कि सेना का कर्तव्य देश की रक्षा करना है, न कि वर्तमान शासन के लिए अपनी ही जनता पर गोली चलाना।

अंतिम चेतावनी: उन्होंने सैनिकों से कहा कि उनके पास फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचा है और उन्हें जल्द ही जनता के पक्ष में खड़ा होना होगा।

क्या है अमेरिका का असली मास्टरप्लान?

जानकारों का मानना है कि वॉशिंगटन में ईरान को लेकर एक बेहद “खतरनाक” योजना पर काम चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन और नरसंहार का हवाला देकर सैन्य हस्तक्षेप या सत्ता परिवर्तन का आधार तैयार कर रहा है।

रणनीति यह नजर आती है कि अयातुल्लाह खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंककर रजा पहलवी को सत्ता की कमान सौंपी जाए। यही कारण है कि ट्रंप और पहलवी दोनों एक ही भाषा का उपयोग कर रहे हैं ताकि ईरान के भीतर असंतोष को हवा दी जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप को जायज ठहराया जा सके।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button