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लोकतंत्र की सशक्त विरासत : पीएम मोदी ने CSPOC-2026 के मंच से दुनिया को दिया भारत की सफलता का मंत्र

नई दिल्ली (एजेंसी)। नई दिल्ली में आयोजित 28वें राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC-2026) का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की अटूट नींव और इसकी वैश्विक भूमिका पर जोर दिया। संविधान सदन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भारतीय लोकतंत्र: विस्तार और नेतृत्व का संगम

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की लोकतांत्रिक शक्ति के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया:

नारी शक्ति का नेतृत्व: उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि देश की राष्ट्रपति और देश की राजधानी की मुख्यमंत्री, दोनों महिलाएं हैं। यह भारत में महिलाओं की लोकतंत्र में केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व को दर्शाता है।

ऐतिहासिक चुनाव: 2024 के आम चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे ‘मानव इतिहास का सबसे विशाल लोकतांत्रिक उत्सव’ बताया। करीब 98 करोड़ पंजीकृत मतदाता और 700 से अधिक राजनीतिक दलों की भागीदारी भारतीय लोकतंत्र की व्यापकता का प्रमाण है।

संविधान सदन की विरासत: पीएम ने उस स्थान के महत्व को रेखांकित किया जहाँ यह सम्मेलन हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसी हॉल में भारत के संविधान की रचना हुई थी, और आज इसे ‘संविधान सदन’ के रूप में एक नई पहचान दी गई है।

राष्ट्रमंडल देशों के साथ साझा विकास

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रमंडल की कुल आबादी का आधा हिस्सा भारत में रहता है। भारत न केवल अपनी प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपने अनुभवों को अन्य सदस्य देशों के साथ साझा करने के लिए भी तत्पर है। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के उत्थान के लिए नए रास्ते बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

‘धैर्य और निष्पक्षता’ के प्रतीक हैं सदन के अध्यक्ष

संसदीय व्यवस्था में ‘स्पीकर’ (अध्यक्ष) की भूमिका पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक अध्यक्ष का सबसे बड़ा गुण उनका धैर्य है। वे बिना ज्यादा बोले सभी सदस्यों की बातों को सुनते हैं और शोरगुल के बीच भी मुस्कान के साथ निष्पक्ष वातावरण बनाए रखते हैं। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि भारत को चौथी बार इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है।

विविधता: चुनौती नहीं, हमारी ताकत

भारत की विकास यात्रा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के समय कई लोगों को संदेह था कि क्या इतनी विविधताओं वाला देश एकजुट रह पाएगा। लेकिन आज भारत ने सिद्ध कर दिया है कि लोकतंत्र ही स्थिरता और तेज विकास का आधार है।

भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।

UPI के माध्यम से भारत डिजिटल भुगतान में अग्रणी है।

वैश्विक स्तर पर भारत सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता और दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु और एजेंडा

यह 28वां CSPOC सम्मेलन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अध्यक्षता में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 42 देशों के 61 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

तकनीकी नवाचार: संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग और डिजिटल प्रबंधन।

सोशल मीडिया का प्रभाव: सांसदों की कार्यप्रणाली पर सोशल मीडिया के असर पर मंथन।

नागरिक भागीदारी: युवाओं और आम जनता में लोकतंत्र के प्रति समझ विकसित करना।

सुरक्षा और कल्याण: सांसदों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा पर विशेष सत्र।

यह तीन दिवसीय सम्मेलन (14 से 16 जनवरी) लोकतांत्रिक संस्थाओं को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पिछला सम्मेलन 2024 में युगांडा में आयोजित किया गया था।

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