गाजा के कायाकल्प के लिए ट्रंप का मास्टर प्लान : ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन, दिग्गजों को मिली कमान

वॉशिंगटन (एजेंसी)। गाजा पट्टी में युद्ध के निशान मिटाने और वहां स्थिरता स्थापित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक पहल की है। ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) नामक एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय की घोषणा की है, जो गाजा के पुनर्निर्माण, शासन और सुरक्षा की देखरेख करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं इस शक्तिशाली बोर्ड के अध्यक्ष होंगे।
शांति और समृद्धि की 20-सूत्रीय योजना
यह पहल ट्रंप की उस व्यापक 20-सूत्रीय योजना का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य इजरायल-हमास संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करना है। योजना अब अपने दूसरे चरण में है, जिसके तहत हमास सत्ता छोड़ेगा, हथियार डालेगा और गाजा का नियंत्रण एक गैर-राजनीतिक ‘तकनीकी प्रशासन’ को सौंपा जाएगा।
बोर्ड ऑफ पीस: मुख्य सदस्य और उनकी भूमिकाएं
व्हाइट हाउस द्वारा जारी सूची के अनुसार, इस बोर्ड में राजनीति और वित्त जगत की सात बड़ी हस्तियों को शामिल किया गया है। ट्रंप ने इसे “अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड” बताया है।
पद / नाम,व्यक्ति
अध्यक्ष,डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति)
सदस्य,मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
सदस्य,जेरेड कुशनेर (पूर्व सलाहकार)
सदस्य,टोनी ब्लेयर (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री)
सदस्य,अजय बंगा (विश्व बैंक अध्यक्ष)
सदस्य,”मार्क रोवन (CEO, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट)”
सदस्य,स्टीव विटकॉफ और रॉबर्ट गेब्रियल
प्रमुख नियुक्तियां:
निकोलाय म्लादेनोव: गाजा के लिए ‘हाई रिप्रेजेंटेटिव’ नियुक्त, जो जमीन पर बोर्ड के फैसलों को लागू करेंगे।
मेजर जनरल जास्पर जेफर्स: ‘इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स’ (ISF) के कमांडर, जिनका काम सुरक्षा और शांति बनाए रखना होगा।
स्थानीय प्रशासन और चुनौतियां
गाजा के दैनिक कामकाज के लिए अली शाथ के नेतृत्व में एक तकनीकी समिति (NCAG) बनाई गई है। काहिरा में हुई पहली बैठक में अली शाथ ने बताया कि गाजा को पूरी तरह बहाल करने में लगभग तीन साल का समय लग सकता है। उनकी प्राथमिकता बेघर हुए लोगों के लिए भोजन और आश्रय सुनिश्चित करना है।
हालांकि, इस योजना को लेकर विशेषज्ञों में मतभेद हैं। कुछ लोग इसे गाजा के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद मान रहे हैं, तो कुछ आलोचक इसे ‘औपनिवेशिक ढांचा’ करार दे रहे हैं क्योंकि एक विदेशी बोर्ड दूसरे क्षेत्र के शासन की निगरानी करेगा। विशेष रूप से टोनी ब्लेयर की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।
10 अक्टूबर को हुए संघर्षविराम के बाद हजारों फिलिस्तीनी अपने घरों को लौट रहे हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस योजना को अपना समर्थन दिया है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय वैधता मिली है।
















