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बजट 2026 : भारतीय रेलवे के कायाकल्प के लिए वित्त मंत्री का क्या है मास्टर प्लान?

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को अपना लगातार नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। पिछले वर्ष (2025-26) में रेलवे को रिकॉर्ड 2.65 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। इस बार सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार पटरियों की सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के लिए अपनी तिजोरी और खोलेगी।

आगामी बजट की मुख्य प्राथमिकताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार का जोर केवल बजट बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सुविधाओं के विस्तार और तकनीक को जमीनी स्तर पर लागू करने पर होगा।

सुरक्षा सबसे ऊपर: ‘कवच’ (Kavach) जैसी एंटी-कोलिजन तकनीक और सिग्नलिंग सिस्टम को देशभर में फैलाने पर बड़ा निवेश संभव है।

आधुनिक ट्रेनें: वंदे भारत और अमृत भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान रहेगा।

बुनियादी ढांचा: ट्रैक बिछाने, विद्युतीकरण और पुराने स्टेशनों के पुनर्विकास को गति दी जाएगी।

बजट अनुमान: 10% की बढ़ोतरी की उम्मीद

बाजार विशेषज्ञों, जैसे स्टॉक्सकार्ट के सीईओ प्रणय अग्रवाल के अनुसार, इस साल रेलवे के पूंजीगत व्यय (Capex) में लगभग 10% की वृद्धि देखी जा सकती है।

संभावित आवंटन: बजट 2.52 लाख करोड़ से बढ़कर 2.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

फंड का उपयोग: दिसंबर 2025 तक रेलवे ने अपने पिछले बजट का 80% हिस्सा खर्च कर लिया है, जो दर्शाता है कि नई परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की सख्त जरूरत है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

रेलवे क्षेत्र में सरकार के निवेश का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है। विश्लेषकों के अनुसार:

ऑर्डर की बौछार: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण से जुड़ी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं।

सरकारी बनाम निजी कंपनियां: सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की कंपनियां उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो स्थिरता चाहते हैं, जबकि निजी कंपनियां नई तकनीक और विकास के मामले में आगे रह सकती हैं।

विशेषज्ञ की राय: एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीमा श्रीवास्तव के अनुसार, लंबे समय के निवेश के लिए रेलवे शेयर एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि हाल के दिनों में इन शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

निवेश से पहले बरतें ये सावधानियां

बजट की घोषणाओं के बीच केवल उत्साह में आकर निवेश न करें। इन बिंदुओं पर ध्यान दें:

कंपनी की ऑर्डरबुक: देखें कि कंपनी के पास भविष्य के लिए कितने काम के कॉन्ट्रैक्ट हैं।

बैलेंस शीट: कंपनी की वित्तीय स्थिति और कर्ज के स्तर की जांच करें।

विविधीकरण: अपना सारा पैसा एक ही सेक्टर में लगाने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश करें।

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