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बजट 2026 : इनकम टैक्स स्लैब स्थिर, पर टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव

नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट पेश किया। मध्यम वर्ग की उम्मीदों के बीच, इस बार निजी आयकर (Income Tax) की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने पिछले साल के सुधारों को ही बरकरार रखने का फैसला किया है।

हालांकि, टैक्स स्लैब में बदलाव न होने के बावजूद, वित्त मंत्री ने टैक्स सिस्टम को अधिक सुव्यवस्थित और ‘यूजर-फ्रेंडली’ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।

टैक्स प्रक्रिया और समय-सीमा में सुधार

बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को कागजी कार्रवाई और समय के दबाव से राहत देने के प्रस्ताव रखे गए हैं:

संशोधित रिटर्न (Updated ITR): अब टैक्सपेयर्स मामूली शुल्क के साथ अपना संशोधित रिटर्न 31 मार्च तक भर सकेंगे, जिसकी समय-सीमा पहले 31 दिसंबर थी।

आईटीआर फाइलिंग की नई तिथियां: * ITR-1 और ITR-2: 31 जुलाई तक।

बिना ऑडिट वाले बिजनेस और ट्रस्ट: अब 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकेंगे।

ऑटोमैटिक सिस्टम: छोटे करदाताओं को ‘शून्य टैक्स कटौती सर्टिफिकेट’ के लिए अब अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे; इसके लिए एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम शुरू किया जाएगा।

प्रमुख राहत और छूट

हादसा राहत: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से प्राप्त ब्याज को अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है और इस पर कोई TDS नहीं कटेगा।

निवेशकों के लिए आसानी: शेयरधारक अब अपने फॉर्म 15G/15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे, जो इसे संबंधित कंपनियों तक पहुंचा देगी।

NRI और विदेशी निवेश: भारत को पूंजीगत सामान (Capital Goods) सप्लाई करने वाले एनआरआई को 5 साल तक टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव है।

विदेश यात्रा और शिक्षा पर कम हुआ TCS

विदेश जाने वालों और बाहर पढ़ने वाले छात्रों के लिए बजट में अच्छी खबर है:

टूर पैकेज: विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले TCS को 5-20% की मौजूदा दरों से घटाकर मात्र 2% कर दिया गया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य: विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे (LRS) पर भी TCS को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।

शेयर बाजार के लिए बुरी खबर: STT में बढ़ोतरी
ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए ट्रांजैक्शन थोड़ा महंगा होने वाला है। वित्त मंत्री ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

फ्यूचर्स (Futures): 0.02% से बढ़कर 0.05%।

ऑप्शंस (Options): 0.01% से सीधे 0.15%।

निष्कर्ष: कुल मिलाकर, यह बजट स्लैब में राहत देने के बजाय नियमों को सरल बनाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर केंद्रित नजर आता है।

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