वन्य जीव केन्द्र में विजिटर्स को मिले इंटरनेशनल एक्सपीरियंस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन अब अध्यात्म के साथ-साथ रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी विश्व स्तरीय गंतव्य बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में करीब 500 हेक्टेयर भूमि पर एक विशाल वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की योजना को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘सफारी अनुभव’ प्रदान करना है।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
मुख्यमंत्री ने ‘समत्व भवन’ में आयोजित बैठक के दौरान निर्देश दिए कि इस केंद्र को गुजरात के ‘वनतारा’ की तर्ज पर विकसित किया जाए। इस परियोजना की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं:
वैश्विक अनुभव: यहाँ आने वाले पर्यटकों को एक ही स्थान पर दुनिया के 11 अलग-अलग जंगलों का अनुभव मिल सकेगा।
प्रजातियों की विविधता: इस केंद्र में 300 से अधिक देशी और विदेशी वन्य जीव होंगे। इनमें 75% भारतीय और 25% विदेशी प्रजातियां शामिल की जाएंगी।
डे-नाइट सफारी: यह केंद्र इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि सैलानी दिन और रात, दोनों समय जंगल की सैर का आनंद ले सकें।
अदृश्य बाड़े (Invisible Fencing): वन्य जीवों के लिए खुले जंगल जैसा वातावरण होगा, जहाँ सुरक्षा के लिए ऐसे अवरोधक लगाए जाएंगे जो दिखाई नहीं देंगे, जिससे पर्यटकों को वास्तविक जंगल जैसा अनुभव होगा।
निर्माण की समयसीमा और विस्तार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
उज्जैन बनेगा वैश्विक पर्यटन का नया केंद्र: 500 हेक्टेयर में आकार लेगा अत्याधुनिक वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर
भोपाल: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन अब अध्यात्म के साथ-साथ रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी विश्व स्तरीय गंतव्य बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में करीब 500 हेक्टेयर भूमि पर एक विशाल वन्य जीव केंद्र सह रेस्क्यू सेंटर के निर्माण की योजना को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘सफारी अनुभव’ प्रदान करना है।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
मुख्यमंत्री ने ‘समत्व भवन’ में आयोजित बैठक के दौरान निर्देश दिए कि इस केंद्र को गुजरात के ‘वनतारा’ की तर्ज पर विकसित किया जाए। इस परियोजना की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं:
वैश्विक अनुभव: यहाँ आने वाले पर्यटकों को एक ही स्थान पर दुनिया के 11 अलग-अलग जंगलों का अनुभव मिल सकेगा।
प्रजातियों की विविधता: इस केंद्र में 300 से अधिक देशी और विदेशी वन्य जीव होंगे। इनमें 75% भारतीय और 25% विदेशी प्रजातियां शामिल की जाएंगी।
डे-नाइट सफारी: यह केंद्र इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि सैलानी दिन और रात, दोनों समय जंगल की सैर का आनंद ले सकें।
अदृश्य बाड़े (Invisible Fencing): वन्य जीवों के लिए खुले जंगल जैसा वातावरण होगा, जहाँ सुरक्षा के लिए ऐसे अवरोधक लगाए जाएंगे जो दिखाई नहीं देंगे, जिससे पर्यटकों को वास्तविक जंगल जैसा अनुभव होगा।
निर्माण की समयसीमा और विस्तार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
पर्यटन और संरक्षण का संगम
डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और जबलपुर में बनने वाले ये केंद्र न केवल पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि घायल वन्य जीवों के उपचार के लिए भी मील का पत्थर साबित होंगे। उज्जैन के इस केंद्र को पर्यटन विभाग के सहयोग से एक भव्य स्वरूप दिया जाएगा, ताकि यह भविष्य में विश्व के बेहतरीन ‘फॉरेस्ट टूरिज्म स्पॉट्स’ में गिना जाए।
इस बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव और गुजरात के ‘वनतारा जू’ से आए विशेषज्ञ व सलाहकार फर्म के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
















