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संसद में गहराया संकट : राहुल गांधी और विपक्ष ने खोला स्पीकर के खिलाफ मोर्चा

नई दिल्ली (एजेंसी)। संसद के वर्तमान बजट सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। ताजा घटनाक्रम में, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के जबरदस्त विरोध के कारण कामकाज ठप हो गया, जिसके चलते सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

विपक्ष का सीधा आरोप है कि सदन के भीतर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है और विपक्षी सदस्यों की बात को अनसुना किया जा रहा है।

टकराव की मुख्य वजहें: आखिर क्यों आर-पार के मूड में है विपक्ष?

विपक्ष और स्पीकर के बीच बढ़ती इस दूरी के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:

अभिव्यक्ति पर अंकुश का आरोप: राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं का दावा है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर उन्हें बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि सदन की कार्यवाही ‘एकतरफा’ तरीके से चलाई जा रही है।

अविश्वास प्रस्ताव की रणनीति: संवैधानिक नियमों के अनुसार, स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है। सूत्रों की मानें तो विपक्षी दलों ने इस पर सहमति बना ली है और जल्द ही लोकसभा महासचिव को औपचारिक नोटिस सौंपा जा सकता है।

हिमंत बिस्वा सरमा का विवादित वीडियो: असम के मुख्यमंत्री का एक हालिया वीडियो (जिसे बाद में सोशल मीडिया से हटा लिया गया) इस विवाद में घी डालने का काम कर रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया है।

सदन की वर्तमान स्थिति पर एक नजर

हंगामे के कारण विधायी कार्यों पर बुरा असर पड़ा है। पिछले कुछ घंटों में सदन के भीतर की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:

घटनाक्रम,विवरण

धन्यवाद प्रस्ताव,भारी शोर-शराबे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के संबोधन के ही पारित करना पड़ा।
कार्यवाही का स्थगन,नारेबाजी और तख्तियां दिखाए जाने के कारण कार्यवाही को बार-बार रोकना पड़ रहा है।
विपक्षी एकजुटता,राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों ने एक साझा रणनीति बनाकर सरकार को घेरने का मन बनाया है।

निष्कर्ष: स्पीकर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाना भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक बड़ी और दुर्लभ घटना है। यदि विपक्ष इस पर आगे बढ़ता है, तो बजट सत्र के शेष दिन राजनीतिक उठापटक की भेंट चढ़ सकते हैं।

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