CBSE बोर्ड का बड़ा बदलाव : 12वीं में अब नहीं मिलेगा ‘अंक सत्यापन’ का मौका, डिजिटल तकनीक से जांची जाएंगी कॉपियां

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। इस नए नियम के तहत, 12वीं कक्षा के परिणामों के बाद छात्र अब ‘मार्क वेरिफिकेशन’ (अंक सत्यापन) के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि नई तकनीक के आने के बाद मानवीय गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ से होगा मूल्यांकन
बोर्ड ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी तरह डिजिटल यानी ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। हाल ही में आयोजित एक वर्कशॉप के दौरान परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि जब कॉपियां डिजिटल रूप से जांची जाएंगी, तो अंकों की गणना (टोटलिंग) में त्रुटि होने की संभावना शून्य हो जाती है। इसी कारण बोर्ड ने परिणाम के बाद होने वाली री-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला लिया है।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
डिजिटल मूल्यांकन की प्रक्रिया को समझने के लिए इसके मुख्य बिंदुओं पर नज़र डालें:
स्कैनिंग: छात्रों की भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को पहले हाई-क्वालिटी स्कैन किया जाएगा।
सुरक्षित एक्सेस: स्कैन की गई कॉपियों को एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
कंप्यूटर पर जांच: शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही उत्तरों का मूल्यांकन करेंगे और अंक देंगे।
ऑटो-कैलकुलेशन: अंकों को जोड़ने का काम सॉफ्टवेयर खुद करेगा, जिससे पुराने ‘मैनुअल टोटलिंग एरर’ की समस्या खत्म हो जाएगी।
शिक्षकों को मिलेगी बड़ी राहत
नए सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह है कि अब शिक्षकों को कॉपियां जांचने के लिए निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे अपने ही स्कूल से सुरक्षित लॉगिन के जरिए इस प्रक्रिया को पूरा कर सकेंगे। इससे शिक्षकों के समय की बचत होगी और मूल्यांकन कार्य अधिक सुव्यवस्थित होगा।
ध्यान देने योग्य बातें
सिर्फ 12वीं के लिए बदलाव: यह डिजिटल सिस्टम फिलहाल केवल कक्षा 12वीं के लिए लागू किया गया है।
10वीं की पुरानी व्यवस्था: कक्षा 10वीं की कॉपियों का मूल्यांकन अभी भी पारंपरिक ‘मैनुअल’ तरीके से ही किया जाएगा।
परीक्षा की तारीख: सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी, 2026 से शुरू होने जा रही हैं।
यह कदम न केवल परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाएगा, बल्कि परिणामों की घोषणा के बाद होने वाली लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी कम करेगा।
















