बांग्लादेश में नई शुरुआत : तारिक रहमान का शपथ ग्रहण कल, भारत से ओम बिरला होंगे शामिल

ढाका (एजेंसी)। बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में कल एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान 17 फरवरी को ढाका के नेशनल पार्लियामेंट हाउस के साउथ प्लाजा में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री करेंगे।
पीएम मोदी की अनुपस्थिति का कारण
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस समारोह के लिए व्यक्तिगत निमंत्रण मिला था, लेकिन अपनी पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण वे ढाका नहीं जा सकेंगे। प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय चर्चाओं और दिल्ली में होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट की तैयारियों में व्यस्त हैं। भारत द्वारा उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजना ढाका के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
निर्वासन से सत्ता तक का सफर
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के लिए यह जीत कई मायनों में खास है:
लंबा इंतजार: रहमान लगभग 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से स्वदेश लौटे थे।
ऐतिहासिक जनादेश: हालिया संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है।
विरासत: वे पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं।
बदलाव की लहर: 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के इस्तीफे के बाद यह देश का पहला चुनाव था, जिसमें रहमान ने राष्ट्रीय एकता और आर्थिक स्थिरता का वादा किया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया आयाम
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को लेकर कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं:
संतुलित विदेश नीति: तारिक रहमान ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर ध्यान देगी।
सहयोग के क्षेत्र: ओम बिरला की उपस्थिति से यह उम्मीद जताई जा रही है कि व्यापार, सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन जैसे साझा मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
शुभकामनाएं: पीएम मोदी ने हाल ही में रहमान से फोन पर बात कर उन्हें जीत की बधाई दी और बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली का स्वागत किया।
निष्कर्ष: यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक है, बल्कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी समृद्धि के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
















