देश-विदेश

अमेरिका-ईरान वार्ता : परमाणु मुद्दे पर सहमति के संकेत, पर ‘रेड लाइन्स’ पर फंसा पेंच

वॉशिंगटन/जिनेवा (एजेंसी)। जिनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया परोक्ष वार्ता (Indirect Talks) ने मिश्रित संकेत दिए हैं। हालांकि दोनों देश कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर सहमत हुए हैं, लेकिन गंभीर मतभेद अब भी बरकरार हैं, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

प्रमुख बिंदु: वार्ता और गतिरोध

बातचीत के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन ईरान अभी भी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा निर्धारित ‘रेड लाइन्स’ (अंतिम सीमाओं) को मानने के लिए तैयार नहीं है। वेंस के अनुसार, अमेरिका केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को मिलने वाली मदद पर भी पूर्ण रोक चाहता है।

दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस दौर को पिछले दौर की तुलना में अधिक “रचनात्मक” बताया। उन्होंने कहा:

“हमने भविष्य के समझौते के लिए कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर व्यापक सहमति बना ली है। अब दोनों पक्ष मसौदा (Draft) तैयार करेंगे, जिसके बाद अगले दौर की तारीख तय होगी।”

बढ़ता सैन्य तनाव और खामेनेई की चेतावनी

कूटनीतिक मेज पर चल रही खींचतान के बीच ज़मीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

इस बयान के तुरंत बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लाइव-फायर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया। यह शक्ति प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ ईरानी तट के अत्यंत करीब तैनात है।

ईरान की मांगें और अमेरिका का रुख

पक्ष, मुख्य मांग / रुख

ईरान,आर्थिक प्रतिबंधों से तुरंत राहत और तेल निर्यात पर लगी रोक हटाना। वार्ता को केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रखना।
अमेरिका,”परमाणु कार्यक्रम के साथ मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी समूहों पर लगाम। कूटनीति विफल होने पर “”सभी विकल्प”” (सैन्य कार्रवाई) खुले रखना।”

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनका देश परमाणु हथियार बनाने का इच्छुक नहीं है और वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय सत्यापन (Verification) के लिए तैयार हैं।

पृष्ठभूमि: कूटनीति या टकराव?

पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच हुए भीषण संघर्ष और उसके बाद ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी ने स्थिति को पहले ही नाजुक बना दिया है। ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी, जो इस मध्यस्थता में अहम भूमिका निभा रहे हैं, ने भी आगाह किया है कि प्रगति के बावजूद अभी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

उपराष्ट्रपति वेंस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि कूटनीति की एक “प्राकृतिक सीमा” होती है और अंततः यह राष्ट्रपति ट्रंप को तय करना होगा कि बातचीत का सिलसिला कब तक जारी रखना है।

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