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अदालती फैसले के पलटवार में ट्रंप का बड़ा दांव : अब दुनिया भर से आने वाले सामान पर लगेगा 10% अतिरिक्त टैक्स

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वहां की न्यायपालिका के बीच व्यापारिक नीतियों को लेकर टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पिछले टैरिफ (आयात शुल्क) को असंवैधानिक करार दिए जाने के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ने एक नया और कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश पर मुहर लगा दी है, जिसके तहत अब दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका आने वाले माल पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लागू होगा।

‘ट्रुथ सोशल’ पर किया एलान

अपनी इस आक्रामक नीति की घोषणा करते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “मुझे यह बताते हुए गर्व है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह फैसला लगभग तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।”

कानून की किस धारा का हुआ इस्तेमाल?

इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि वह 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत इस अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह 10% शुल्क मौजूदा टैरिफ के ऊपर होगा और भविष्य में इसे और भी बढ़ाया जा सकता है।

समय सीमा: धारा 122 के तहत लगाया गया यह शुल्क फिलहाल 150 दिनों (लगभग 5 महीने) के लिए प्रभावी रहेगा।

अगला कदम: इस अवधि के दौरान अमेरिकी प्रशासन विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक संतुलन की समीक्षा करेगा ताकि स्थायी शुल्क तय किए जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की नाराजगी

हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था कि राष्ट्रपति बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत अपनी मर्जी से टैरिफ नहीं थोप सकते।

इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “यह फैसला बेहद निराशाजनक है और मुझे अदालत के कुछ सदस्यों के रुख पर शर्म आती है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह हास्यास्पद है कि एक राष्ट्रपति व्यापार को नियंत्रित कर सकता है, प्रतिबंध लगा सकता है, लेकिन 1 डॉलर का शुल्क नहीं लगा सकता।

अन्य कानूनी विकल्पों की तैयारी

ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वे केवल धारा 122 तक सीमित नहीं रहेंगे। आने वाले समय में निम्नलिखित धाराओं के तहत भी कार्रवाई हो सकती है:

धारा 232: राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ।

धारा 301: अनुचित व्यापारिक प्रथाओं को रोकने के लिए टैक्स।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार, आने वाले दिनों में इन धाराओं के तहत नई जांच शुरू की जाएगी जो कानूनी रूप से अधिक ठोस होगी।

क्या रिफंड होगा पुराना पैसा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पिछले साल वसूले गए 175 अरब डॉलर के राजस्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि यह पैसा कंपनियों को वापस करना पड़ सकता है। हालांकि, ट्रंप ने इस पर कहा कि यह मामला अभी कम से कम दो साल तक अदालतों में खिंचेगा। वहीं, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का मानना है कि नए टैरिफ लागू होने से 2026 में राजस्व की स्थिति स्थिर बनी रहेगी।

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