उज्जैन की ‘गेर’ परंपरा : सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य से जुड़ी है रंगपंचमी की यह सांस्कृतिक विरासत

भोपाल/उज्जैन (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में रंगपंचमी के अवसर पर आयोजित ‘ध्वज चल समारोह’ (गेर) में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने इस परंपरा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सम्राट विक्रमादित्य के काल से जुड़ा बताया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नगर की इस प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने के लिए शासन की ओर से ₹1.25 लाख की निरंतर सहयोग राशि प्रदान की जाएगी।
सैनिक विजय का प्रतीक है ‘गेर’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, प्राचीन अवंतिका (वर्तमान उज्जैन) में सम्राट विक्रमादित्य के समय सैन्य छावनियों से सैनिक अपनी विजय के प्रतीक और ध्वज लेकर नगर भ्रमण पर निकलते थे। समय के साथ उत्सव के इस स्वरूप को ‘गेर’ के नाम से जाना जाने लगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है।
महाकाल मंदिर में शस्त्र और ध्वज पूजन
रविवार को मुख्यमंत्री ने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक किया। इसके पश्चात उन्होंने मंदिर के सभा मंडप में:
भगवान वीरभद्र और श्री महाकाल के पवित्र ध्वजों का पूजन किया।
परंपरागत शस्त्रों की पूजा अर्चना की।
स्वयं हाथ में ध्वज लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक पदयात्रा की।
इस अवसर पर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए गए कि गेर के आयोजनों के संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए।
फूलों की होली और देशभक्ति का संगम
महाकाल मंदिर में पूजा के बाद मुख्यमंत्री सिंधी कॉलोनी से निकलने वाली गेर में शामिल हुए और टॉवर चौक पर आम जनता के साथ फूलों की होली खेली।
“जीवन के विविध रंगों के बीच सबसे महत्वपूर्ण रंग हमारे दिलों का है, जिसमें एक-दूसरे के लिए सम्मान और देशभक्ति का भाव हो।” — डॉ. मोहन यादव
उत्सव का माहौल उस समय और भी भावुक हो गया जब मुख्यमंत्री ने नागरिकों के साथ मिलकर ‘ये देश है वीर जवानों का’ गीत गाया। उन्होंने यह संदेश दिया कि हमारी खुशियों के रंग उन सैनिकों की बदौलत सुरक्षित हैं जो सीमाओं पर तैनात हैं।
















