टॉप न्यूज़

वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत का बड़ा कदम : अब अफ्रीका और अमेरिका से बढ़ेगा कच्चा तेल आयात

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से भारतीय रिफाइनरियों ने अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।

वैकल्पिक बाज़ारों पर बढ़ता भरोसा

रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचपीसीएल (HPCL) जैसी प्रमुख भारतीय तेल कंपनियों ने अब पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और रूस से कच्चे तेल की खरीदारी में तेजी ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीतिक बदलाव होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए किया गया है। वर्तमान में, भारत के कुल तेल आयात में गैर-होर्मुज स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर 70% तक पहुँच गई है, जो पिछले वर्ष लगभग 60% थी।

भारत का ‘ऑयल बैकअप’ कितना मजबूत है?

आपूर्ति में किसी भी संभावित रुकावट से निपटने के लिए भारत ने पर्याप्त तेल भंडार (Oil Reserves) सुनिश्चित किया है:

घरेलू भंडार: वर्तमान में देश के पास लगभग 14.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल उपलब्ध है, जो 50 दिनों की मांग पूरी कर सकता है।

रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): आपातकालीन स्थिति के लिए लगभग 9.5 दिनों का अतिरिक्त कोटा सुरक्षित है।

कुल क्षमता: सरकारी कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक को मिलाकर भारत के पास करीब 74 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल मौजूद है।

क्यों बढ़ रही हैं वैश्विक कीमतें?

अमेरिका-ईरान संघर्ष और कुवैत द्वारा उत्पादन में की गई कटौती ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मचा दी है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमतों में 35% तक का उछाल देखा गया है। ऐसे में रूस को मिली अस्थायी अमेरिकी छूट भारत के लिए एक राहत बनकर उभरी है, जिससे रियायती दरों पर तेल की उपलब्धता बनी हुई है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button