छत्तीसगढ़ में ‘गौधाम योजना’ का शंखनाद : निराश्रित गौवंश को मिलेगा नया ठिकाना

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार राज्य में गौवंश संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। आज, 14 मार्च को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय से ‘गौधाम योजना’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित और घुमंतू पशुओं को सुरक्षित आश्रय और बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।
योजना का खाका और विस्तार
राज्य सरकार ने पशुधन की सुरक्षा के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है:
लक्ष्य: प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम बनाए जाएंगे। इस प्रकार पूरे राज्य में कुल 1,460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य है।
शुरुआत: आज बिलासपुर के लाखासार (तखतपुर) स्थित गौधाम के साथ-साथ 10 अन्य जिलों के 28 केंद्रों का भी वर्चुअल उद्घाटन होगा।
सुविधाएं: इन केंद्रों पर पशुओं के लिए शेड, बिजली, पेयजल और चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
संचालन और वित्तीय सहायता
सरकार ने इन गौधामों के रख-रखाव के लिए एक सुव्यवस्थित आर्थिक मॉडल तैयार किया है:
मद,सहायता राशि / प्रावधान
भोजन सहायता,पहले वर्ष ₹10 से शुरू होकर चौथे वर्ष तक ₹35 प्रतिदिन (प्रति पशु)
बुनियादी ढांचा,मरम्मत और निर्माण हेतु ₹5 लाख प्रति वर्ष
मानदेय,”गौसेवकों को ₹13,126 और चरवाहों को ₹10,916 प्रति माह”
चारा विकास,”प्रति एकड़ ₹47,000 की सहायता (अधिकतम 5 एकड़ तक)”
प्रमुख उद्देश्य और प्रबंधन
इस योजना का प्रबंधन पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs), ट्रस्ट, सहकारी समितियों और किसान उत्पादक कंपनियों (FPOs) के माध्यम से किया जाएगा।
सड़क सुरक्षा: आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
गौ-संवर्धन: जब्त किए गए और बीमार गौवंश की देखभाल बेहतर ढंग से हो सकेगी।
रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में गौसेवकों और चरवाहों के लिए आय के नए स्रोत बनेंगे।
मुख्यमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल गौवंश सुरक्षित होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
















