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‘बिहान’ योजना से संवर रहा ग्रामीण महिलाओं का भविष्य, सेंट्रिंग व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर

धमतरी। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे ‘बिहान’ के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण का एक प्रमुख आधार स्तंभ बनकर उभरा है। धमतरी जिले में इस मिशन ने महिलाओं को न केवल संगठित किया है, बल्कि उन्हें परंपरागत घरेलू कार्यों से बाहर निकालकर व्यावसायिक मंच भी प्रदान किया है।

आर्थिक स्वावलंबन का नया जरिया: सेंट्रिंग प्लेट व्यवसाय

हाल के वर्षों में धमतरी की ग्रामीण महिलाओं ने निर्माण क्षेत्र से जुड़ा एक अनूठा व्यवसाय अपनाया है। जिले के विभिन्न विकासखंडों की कुल 58 महिला सदस्य अब सेंट्रिंग प्लेट के निर्माण और उन्हें किराये पर देने के कार्य से अपनी पहचान बना रही हैं।

क्षेत्रवार भागीदारी:

धमतरी: 27 महिलाएं

कुरूद: 15 महिलाएं

नगरी: 09 महिलाएं

मगरलोड: 07 महिलाएं

वित्तीय सहायता और निवेश

इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन द्वारा व्यवस्थित वित्तीय ढांचा तैयार किया गया। समूहों को उनके प्रोजेक्ट के आधार पर तीन स्तरों पर ऋण सहायता प्रदान की गई:

आरएफ (RF) मद: ₹15,000

सीआईएफ (CIF): ₹60,000

बैंक ऋण: ₹3,00,000

इस पूंजी निवेश के माध्यम से समूहों ने लगभग 59,300 वर्गफीट सेंट्रिंग प्लेट खरीदी हैं। आज ये महिलाएं इन प्लेटों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और स्थानीय बाजार में ₹20 से ₹25 प्रति वर्गफीट की दर से किराये पर दे रही हैं, जिससे उन्हें हर महीने एक स्थिर आय प्राप्त हो रही है।

सामाजिक और मानसिक परिवर्तन

यह केवल पैसों की बात नहीं है; यह आत्मविश्वास की कहानी है। जो महिलाएं पहले केवल खेती या मजदूरी पर निर्भर थीं, वे अब अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं।

समय पर ऋण अदायगी: महिलाएं न केवल अपनी कमाई से घर चला रही हैं, बल्कि बैंक की किश्तें भी समय पर चुका रही हैं।

बढ़ता सम्मान: आर्थिक स्वतंत्रता के कारण परिवारों और समाज में इन महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण बदला है।

प्रशासनिक सहयोग: जिला पंचायत धमतरी द्वारा महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की समझ विकसित करने में निरंतर सहयोग दिया जा रहा है।

‘बिहान’ योजना ने यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधन मिलें, तो वे अपनी किस्मत खुद बदल सकती हैं। धमतरी की इन महिलाओं की सफलता अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाती है कि संगठित प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी जा सकती है।

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