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भारत की हवाई सुरक्षा में बड़ा इजाफा : रूस से रवाना हुआ चौथा S-400 स्क्वाड्रन

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत अपनी सैन्य शक्ति और हवाई सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा चुका है। रूस के साथ हुए महत्वपूर्ण रक्षा समझौते के तहत, S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की चौथी खेप भारत के लिए रवाना हो चुकी है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के संकेत बताते हैं कि यह आधुनिक सिस्टम जल्द ही भारतीय बेड़े में शामिल होकर सीमाओं की निगरानी शुरू कर देगा।

रणनीतिक तैनाती और प्रभाव

माना जा रहा है कि चौथे S-400 स्क्वाड्रन को पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान बॉर्डर) पर तैनात किया जाएगा। यह कदम न केवल सीमा पार से होने वाली हवाई गतिविधियों पर लगाम कसेगा, बल्कि भारत के डिफेंस कवर को और भी सघन बना देगा।

पिछली उपलब्धियां: अब तक प्राप्त तीन स्क्वाड्रनों को सिलीगुड़ी कॉरिडोर, पठानकोट और पश्चिमी सेक्टर जैसे संवेदनशील इलाकों में पहले ही तैनात किया जा चुका है।

सफलता का रिकॉर्ड: इन सिस्टमों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान दुश्मन की मिसाइलों के खतरे को नाकाम करने में अपनी काबिलियत साबित की है।

S-400 की ताकत: एक नजर में
S-400 को दुनिया के सबसे बेहतरीन ‘एयर डिफेंस शील्ड’ के रूप में जाना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

विशेषता, विवरण

रेंज,400 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता
लक्ष्य,”फाइटर जेट, स्टेल्थ ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें”
ट्रैकिंग,एक साथ कई सौ लक्ष्यों को ट्रैक करने की शक्ति
सुरक्षा,बहु-स्तरीय (Multi-layered) सुरक्षा कवच प्रदान करना

भविष्य की योजनाएं

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पांचवां और अंतिम स्क्वाड्रन भी इस वर्ष के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ को देखते हुए, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने पांच और अतिरिक्त प्रणालियों की खरीद को हरी झंडी दे दी है।

इस नई खेप के आने से भारत का “सुपर शील्ड” अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सटीक हो जाएगा, जो किसी भी हवाई घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।

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