अमेरिकी ऊर्जा बाजार में UAE की बड़ी सेंध : गैस पाइपलाइन नेटवर्क पर अरब देशों का बढ़ता दबदबा

नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक ऊर्जा राजनीति (Energy Politics) में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, वहीं दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) चुपचाप अमेरिका के भीतर ही अपना ऊर्जा साम्राज्य खड़ा कर रहा है। अबू धाबी की एक प्रमुख निवेश फर्म ने अमेरिकी गैस पाइपलाइन नेटवर्क में अरबों डॉलर का निवेश कर दुनिया को चौंका दिया है।
2.25 अरब डॉलर का मेगा सौदा
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अबू धाबी स्थित निवेश कंपनी 2PointZero ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘ट्रैवर्स मिडस्ट्रीम पार्टनर्स’ (Traverse Midstream Partners) में 100% हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। यह सौदा करीब 2.25 अरब डॉलर का बताया जा रहा है।
नेतृत्व: यह निवेश फर्म अबू धाबी के डिप्टी रूलर शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान के अधीन काम करती है।
प्रक्रिया: इस डील को ‘ई पॉइंट जीरो होल्डिंग’ के जरिए अंजाम दिया जाएगा। हालांकि, इसे अभी अमेरिकी रेगुलेटरी संस्थाओं से अंतिम हरी झंडी मिलना बाकी है।
इन रणनीतिक संपत्तियों पर होगा कब्जा
इस अधिग्रहण के साथ ही अमेरिका की कुछ सबसे महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन प्रणालियों का नियंत्रण यूएई के पास चला जाएगा। इसमें मुख्य रूप से दो बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं:
रोवर पाइपलाइन (Rover Pipeline): यह अमेरिका का एक विशाल इंटरस्टेट गैस नेटवर्क है। यह यूटिका और मार्सेलस शेल क्षेत्रों से प्राकृतिक गैस को लेकर अमेरिकी मिडवेस्ट, गल्फ कोस्ट और कनाडा के बाजारों तक सप्लाई करता है।
ओहियो रिवर सिस्टम (Ohio River System): यह आधुनिक बुनियादी ढांचा गैस उत्पादन केंद्रों को मुख्य ऊर्जा कॉरिडोर से जोड़ने का काम करता है।
बदलती रणनीति: सिर्फ तेल उत्पादक नहीं, अब मालिक भी
मिडिल ईस्ट के देशों ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। वे अब केवल कच्चे तेल के निर्यातक बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि वे दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं (जैसे अमेरिका) के घरेलू बुनियादी ढांचे में सीधी हिस्सेदारी चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि: यूएई का यह कदम पिछले साल घोषित किए गए उस प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत वह अगले दशक में अमेरिका में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश करने वाला है। अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने भी हाल ही में अपनी ऊर्जा संपत्तियों के प्रबंधन के लिए ‘XRG’ नाम से एक नई शाखा बनाई है।
निष्कर्ष: ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ती पकड़
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक खींचतान के बीच, यूएई का अमेरिकी पाइपलाइन नेटवर्क में घुसना बेहद रणनीतिक है। इससे न केवल अरब देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक संकट के समय ऊर्जा आपूर्ति की कमान भी उनके हाथों में अधिक सुरक्षित रहेगी। यह निवेश साबित करता है कि आने वाले समय में ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर मिडिल ईस्ट का प्रभाव भौगोलिक सीमाओं से परे होगा।
















