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मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव : अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने दागीं मिसाइलें, कुवैत और बहरीन अलर्ट पर

दुबई (एजेंसी)। ईरान के तटीय क्षेत्रों (सिरीक और केश्म द्वीप) पर अमेरिकी सेना के हवाई हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के प्रतिशोध में ईरान की सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने शनिवार को एक बयान जारी कर दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस विंग ने क्षेत्र में मौजूद ‘दुश्मन के सैन्य ठिकानों’ को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागी हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच क्यों भड़की चिंगारी?

यह तनाव तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के तटीय रडार केंद्रों पर बमबारी करने की पुष्टि की। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उन चार ईरानी सुसाइड ड्रोन्स को नष्ट करने के जवाब में की गई थी, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन चुके थे।

मिसाइल हमलों से दहल उठे खाड़ी देश

ईरानी जवाबी कार्रवाई के बाद कुवैत और बहरीन में सुरक्षा एजेंसियां अत्यधिक सतर्क हो गई हैं:

बहरीन: देश में हवाई हमले के सायरन बजाकर नागरिकों को तुरंत सुरक्षित बंकरों और ठिकानों में शरण लेने के निर्देश दिए गए।

कुवैत: कुवैती सेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नागरिकों को आश्वस्त किया कि अगर उन्हें धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं, तो वे घबराएं नहीं, क्योंकि सुरक्षा बल दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर रहे हैं।

अमेरिकी सेना का दावा: हमले रहे नाकाम

पेंटागन के मुताबिक, ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने इनमें से छह मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने टारगेट तक पहुँचने से पहले ही क्रैश हो गई।

इसके साथ ही, अमेरिका ने ईरान के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) के हेडक्वार्टर को तबाह करने की बात कही गई थी। अमेरिकी कमांड ने स्पष्ट किया कि इस हमले में उनका कोई भी सैनिक हताहत नहीं हुआ है और न ही मुख्यालय को कोई नुकसान पहुँचा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी

खाड़ी क्षेत्र में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इस बीच ईरान (IRGC) ने एक कड़ा अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने अपनी आक्रामक सैन्य गतिविधियां बंद नहीं कीं, तो वे वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह ब्लॉक कर देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वाशिंगटन की होगी।

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