जगन्नाथ मंदिर : 48 वर्षों बाद खुला 12वीं सदी का ‘रत्न भंडार’, आधुनिक तकनीक से होगी खजाने की गिनती

पुरी (एजेंसी)। ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (Ratna Bhandar) के द्वारों को लगभग आधी सदी के अंतराल के बाद दोबारा खोला गया है। 12वीं शताब्दी से संचित इस ऐतिहासिक खजाने की इन्वेंट्री का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है। प्रशासन का लक्ष्य सदियों पुरानी इस धरोहर का पूर्ण विवरण तैयार करना और इसे भविष्य के लिए सुरक्षित करना है।
इन्वेंट्री प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और रत्न भंडार समिति के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ कई चरणों में आयोजित की जा रही है:
दूसरा चरण: 9, 10 और 11 अप्रैल।
आगामी सत्र: 13 अप्रैल और फिर 16 से 18 अप्रैल तक।
समय सीमा: बुधवार को शुरू हुए इस चरण में विशेषज्ञों की टीम प्रतिदिन लगभग 7-8 घंटे काम कर रही है।
खजाने का मुख्य विवरण
अंतिम बार वर्ष 1978 में इस खजाने की गणना की गई थी। उस समय के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर रत्न भंडार में कुल 111 बहुमूल्य आभूषण दर्ज हैं:
स्वर्ण आभूषण: 78 (सोने से निर्मित या मिश्रित)।
रजत आभूषण: 33 (चांदी से निर्मित)।
विशेष ध्यान: इस बार मुख्य फोकस उन आभूषणों पर है जिनका उपयोग ‘सुनाबेशा’ (Suna Besha) उत्सव के दौरान किया जाता है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है।
तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता
अतीत की तुलना में इस बार प्रशासन 21वीं सदी की आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। खजाने के दस्तावेजीकरण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा रहे हैं:
प्रत्येक आभूषण की हाई-डेफिनिशन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी।
पुरातन रत्नों की 3D मैपिंग।
पारदर्शिता के लिए रत्न विशेषज्ञों, स्वर्णकारों और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त निगरानी।
पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देव ने भी इस प्रक्रिया का निरीक्षण किया और निर्देश दिए कि कार्य में जल्दबाजी के बजाय सटीकता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
रत्न भंडार की संरचना
मंदिर के इस रहस्यमयी खजाने को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है:
आंतरिक कक्ष (Inner Chamber): यहाँ सदियों पुराने अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान आभूषण रखे जाते हैं।
बाहरी कक्ष (Outer Chamber): यहाँ उन जेवरों को रखा जाता है जो प्रमुख त्योहारों और विशेष अवसरों पर निकाले जाते हैं।
दैनिक श्रृंगार कक्ष: इसमें भगवान के रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुएं शामिल हैं, जिनकी गिनती पहले ही पूरी हो चुकी है।
श्रद्धालुओं के लिए निर्देश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खजाने की गिनती के दौरान मंदिर के सभी धार्मिक अनुष्ठान यथावत चलते रहेंगे। हालांकि, सुरक्षा कारणों से दर्शनार्थियों को गर्भगृह से एक निश्चित दूरी बनाए रखनी होगी। 48 वर्षों बाद इस प्रक्रिया के शुरू होने से भक्तों के बीच भारी उत्साह और कौतूहल का माहौल है।










