जम्मू-कश्मीर : सुरक्षाबलों को दहलाने की बड़ी साजिश विफल, शोपियां में 14 किलो विस्फोटक बरामद

श्रीनगर (एजेंसी)। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों की सतर्कता से एक भीषण आतंकी हमला टल गया है। बुधवार को सेना ने एक बड़े तलाशी अभियान के दौरान करीब 14.3 किलोग्राम वजनी ‘इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ (IED) बरामद कर आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
सड़क के नीचे बिछाया गया था मौत का जाल
सैन्य सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने जैनापोरा-चित्रागाम मार्ग पर इस शक्तिशाली आईईडी को छिपाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षाबलों के काफिले और गश्ती दलों को निशाना बनाना था।
सटीक कार्रवाई: 44 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के जवानों को तड़के तलाशी के दौरान संदिग्ध वस्तु दिखी।
सुरक्षित निष्पादन: तुरंत यातायात रोककर बम निरोधक दस्ते (BDS) को सूचित किया गया। विशेषज्ञों ने विस्फोटक को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर नियंत्रित धमाके के जरिए नष्ट कर दिया।
तलाशी अभियान: इस घटना के बाद सेना, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर हमलावरों की तलाश तेज कर दी है।
आतंकवाद के मददगार दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ‘सफेदपोश आतंकवाद’ के खिलाफ कड़ा प्रहार किया है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद विरोधी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत दो सरकारी कर्मियों को सेवा से मुक्त कर दिया है।
बर्खास्त किए गए कर्मचारी:
फरहत अली खांडे: रामबन का निवासी और शिक्षा विभाग में तैनात। जांच में पाया गया कि वह ‘हिजबुल मुजाहिदीन’ के लिए फंडिंग जुटाने और युवाओं को गुमराह करने का काम करता था।
शफी डार: बांदीपोरा का निवासी और ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत। उस पर ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के आतंकियों को पनाह देने और पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में रहने के आरोप सिद्ध हुए हैं।
प्रशासन का पक्ष: अधिकारियों का कहना है कि ये कर्मचारी सरकारी तंत्र का हिस्सा बनकर देश विरोधी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे। सुरक्षा एजेंसियां काफी समय से इनके खिलाफ ठोस सबूत जुटा रही थीं।
अब तक की कार्रवाई का लेखा-जोखा
जम्मू-कश्मीर प्रशासन पिछले कुछ वर्षों से उन सरकारी कर्मचारियों पर पैनी नजर रख रहा है जिनके तार अलगाववादी या आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।
कुल बर्खास्तगी: पिछले पांच वर्षों में अब तक 90 सरकारी कर्मचारियों को आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण नौकरी से निकाला जा चुका है।
नीति: प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी तंत्र के भीतर बैठकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
यह कार्रवाई सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और प्रशासन की सख्त नीति के मेल को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य घाटी में शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
















