ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान बेहाल : पेट्रोलियम मंत्री ने स्वीकारी अपनी लाचारी, भारत की ताकत का किया गुणगान

नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर ईंधन की भारी किल्लत पैदा कर दी है। जहाँ ईरान समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था इस युद्ध की भेंट चढ़ रही है, वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है। हाल ही में पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान देश की खस्ताहाल ऊर्जा स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया।
‘एक दिन का भी सुरक्षित भंडार नहीं’
मंत्री अली मलिक ने बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि पाकिस्तान के पास रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) के नाम पर कुछ भी नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि देश के पास वर्तमान में केवल 5 से 7 दिनों का ही ‘कमर्शियल’ कच्चा तेल बचा है। यदि सप्लाई में कोई भी बड़ा विघ्न आता है, तो देश के पास बैकअप के तौर पर कोई सरकारी स्टॉक मौजूद नहीं है।
भारत की तुलना में कहीं नहीं टिकता पाकिस्तान
इंटरव्यू के दौरान मलिक ने भारत की मजबूत स्थिति की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा:
“हमारी तुलना में भारत बहुत सुरक्षित स्थिति में है। उनके पास 60 से 70 दिनों का विशाल तेल भंडार है। भारत की अंतरराष्ट्रीय साख ऐसी है कि वह एक हस्ताक्षर मात्र से दुनिया के किसी भी कोने से तेल मंगा सकता है, जबकि हम आज भी रिसर्च और रिपोर्टों के जाल में फंसे हैं।”
मलिक ने आगे बताया कि पाकिस्तान ने रणनीतिक भंडार बनाने के लिए विशेषज्ञों से राय तो ली है, लेकिन इसमें आने वाली अरबों डॉलर की भारी लागत के कारण यह योजना अभी तक कागजों तक ही सीमित है।
आसमान छूती कीमतें और सरकार की मजबूरी
वैश्विक बाजार की अस्थिरता पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि दुबई में कच्चे तेल की कीमतों ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे पाकिस्तान को आयात करना बहुत महंगा पड़ रहा है। हालांकि, शहबाज शरीफ सरकार जनता को कुछ राहत देने के लिए सब्सिडी का प्रयास कर रही है, लेकिन घटता खजाना इसमें बड़ी बाधा है।
दोनों देशों के बीच का बड़ा अंतर
भारत और पाकिस्तान के तेल भंडारण क्षमता में जमीन-आसमान का अंतर है:
भारत की शक्ति: भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन (लगभग 3.69 करोड़ बैरल) क्षमता का रणनीतिक भंडार है, जो आपातकाल की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
पाकिस्तान की स्थिति: पाकिस्तान के पास शून्य रणनीतिक भंडार है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे को देखते हुए अब इस्लामाबाद 90 दिनों का स्टॉक बनाने की योजना बना रहा है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इसे धरातल पर उतारना एक बड़ी चुनौती है।
















