छत्तीसगढ़

राज्यपाल का छात्राओं को मूलमंत्र : अनुशासन और कठिन परिश्रम से ही मिलेगी सफलता

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने हाल ही में राजभवन (लोकभवन) में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान छात्राओं से सीधा संवाद किया। रायपुर के संत गोविंद राम शदाणी शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय की छात्राओं के साथ हुई इस मुलाकात में राज्यपाल ने जीवन में उन्नति और व्यक्तित्व विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

राज्यपाल के मार्गदर्शन की मुख्य बातें:

राज्यपाल डेका ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर जोर दिया, जो किसी भी विद्यार्थी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं:

अनुशासन की अनिवार्यता: उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुशासन के कोई भी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती। यह सफलता की पहली सीढ़ी है।

नियोजित जीवन: राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने कार्यों की रूपरेखा पहले से तैयार करनी चाहिए। एक अच्छी कार्ययोजना ही एक व्यवस्थित और सफल जीवन का आधार बनती है।

कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं: लक्ष्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे केवल अटूट परिश्रम और लगन से ही प्राप्त किया जा सकता है।

आत्म-संतुष्टि और तुलना: उन्होंने एक बहुत ही गहरी बात कही कि खुशी मनुष्य के भीतर होती है। हमें दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी होने के बजाय, अपने पास उपलब्ध संसाधनों में खुश रहना सीखना चाहिए।

नारी शक्ति और संस्कृति

भारतीय संस्कृति में महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने एक सुंदर उदाहरण दिया। उन्होंने नारी की तुलना ‘जल’ से की और कहा कि जिस प्रकार जल के बिना जीवन संभव नहीं है, ठीक उसी प्रकार स्त्री के बिना इस सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

छात्राओं के मन की जिज्ञासा

संवाद के दौरान छात्राओं ने राज्यपाल से कई प्रासंगिक और प्रेरणादायक प्रश्न पूछे, जिनमें मुख्य थे:

तनाव (Stress) को सकारात्मक ऊर्जा में कैसे परिवर्तित करें?

सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रभाव से खुद को कैसे बचाएं?

देश और प्रदेश की प्रगति में युवाओं की क्या भूमिका हो सकती है?

कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) का आज के समय में क्या महत्व है?

इन सभी सवालों पर राज्यपाल ने विस्तार से अपनी राय रखी और अपने छात्र जीवन के कुछ प्रेरक अनुभव भी साझा किए।

कार्यक्रम के अन्य मुख्य अंश

क्षेत्रीय विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उनके सवालों के जवाब दिए।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. उषा अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने छात्राओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल सहित कॉलेज के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। यह आयोजन छात्राओं के लिए न केवल शैक्षणिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी बेहद प्रेरणादायक रहा।

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