छत्तीसगढ़

गर्मी की छुट्टियों में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ उठा विरोध

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) के दौरान ली जाने वाली भारी-भरकम फीस के खिलाफ अब आवाजें बुलंद होने लगी हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अय्यूब खान के नेतृत्व में अभिभावकों और छात्रों के एक दल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस ज्ञापन के जरिए ‘नो स्कूल-नो फीस’ के नियम को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।

प्रमुख मांगें और मुद्दे:

अनुचित शुल्क वृद्धि पर रोक: ज्ञापन में इस बात पर चिंता जताई गई है कि निजी शिक्षण संस्थान हर साल बिना किसी ठोस आधार के मासिक शुल्क में ₹700 से ₹1000 तक का इजाफा कर रहे हैं। यह मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है।

छुट्टियों में फीस का विरोध: अय्यूब खान का तर्क है कि जब अप्रैल, मई और जून के महीनों में स्कूल बंद रहते हैं और बस जैसी सुविधाओं का उपयोग नहीं होता, तो इन महीनों का ट्यूशन और परिवहन शुल्क लेना पूरी तरह से अनुचित है।

शिक्षा का व्यवसायीकरण: प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को सचेत किया कि शिक्षा को लाभ कमाने का जरिया बनाने के बजाय इसे सुलभ और सस्ता बनाया जाना चाहिए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और परेशान अभिभावक मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की अपील की है।

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