छत्तीसगढ़

बिहान योजना : छत्तीसगढ़ की महिलाओं के बढ़ते कदम, अब खुद दे रही हैं दूसरों को काम

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक नया सवेरा साबित हो रही है। इस अभियान ने प्रदेश की महिलाओं को घर की चौखट से निकालकर उद्यमिता की राह दिखाई है। सरगुजा जिले की धनेश्वरी साहू और भगवती सिंह जैसी महिलाओं की सफलता इस बदलाव की जीती-जागती तस्वीर पेश करती है।

धनेश्वरी साहू: खेती से बनीं बिजनेस वुमन

लखनपुर ब्लॉक के गुमगराकला गांव की रहने वाली धनेश्वरी साहू ने ‘जय संतोषी मां स्वयं सहायता समूह’ का दामन थामकर अपनी किस्मत बदली।

शुरुआत: उन्होंने समूह से ₹1 लाख का लोन लिया।

नवाचार: पारंपरिक खेती के बजाय उन्होंने एक एकड़ जमीन पर आधुनिक तकनीक से खीरे की पैदावार शुरू की।

परिणाम: आज उनकी फसल अंबिकापुर की मंडियों में हाथों-हाथ बिक रही है।

बदलाव: खास बात यह है कि धनेश्वरी अब सिर्फ खेती नहीं कर रहीं, बल्कि अपने खेत में गांव के ही 4 अन्य लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। एक गृहणी से ‘एंप्लॉयर’ बनने का उनका यह सफर प्रेरणादायक है।

भगवती सिंह: ‘लखपति दीदी’ बनने का सफर

गुमगरा खुर्द की भगवती सिंह की कहानी भी कड़ी मेहनत और सही अवसर की मिसाल है। उन्होंने ‘रेखा महिला स्व-सहायता समूह’ के जरिए छोटे निवेश से बड़े सपने सच किए।

सब्जी उत्पादन: सबसे पहले ₹15 हजार से सब्जी की खेती शुरू की।

ईंट निर्माण: काम बढ़ा तो ₹30 हजार और लगाए और ईंट बनाने का काम शुरू किया, जिससे उन्हें बड़ा मुनाफा हुआ।

विविध आय: बैंक से ₹50 हजार का ऋण लेकर उन्होंने किराना और कपड़े की दुकान भी खोल ली।

इन विभिन्न माध्यमों से होने वाली कमाई ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ का खिताब दिलाया है। आज उनके पास अपना पक्का मकान है और वे अपने बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दिला पा रही हैं।

सशक्तीकरण और बढ़ता आत्मविश्वास

बिहान योजना ने इन महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि समाज में उन्हें एक नई पहचान और सम्मान भी दिलाया है। धनेश्वरी और भगवती अपनी इस कामयाबी के लिए शासन की योजनाओं को श्रेय देती हैं।

आज छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में बिहान से जुड़कर हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह योजना न केवल गरीबी दूर कर रही है, बल्कि प्रदेश के विकास में महिलाओं की भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रही है।

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