रायपुर AIIMS में बेड की भारी किल्लत : मरीजों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ, रेफरल का बढ़ा सिलसिला

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) इन दिनों भारी दबाव से गुजर रहा है। अस्पताल की क्षमता से अधिक मरीजों के पहुंचने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। आलम यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ‘बेड उपलब्ध नहीं है’ कहकर अन्य चिकित्सालयों में भेजा जा रहा है।
प्रमुख समस्याएँ और वर्तमान स्थिति
बेड की कमी और रेफरल: एम्स में बेड खाली न होने की वजह से गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भी मेकाहारा (आंबेडकर अस्पताल) या डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया जा रहा है। प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीजों को दूसरे अस्पतालों की राह देखनी पड़ रही है।
मरीजों का भारी दबाव: एम्स की ओपीडी में हर दिन लगभग 3,000 से 4,000 लोग इलाज के लिए पहुँच रहे हैं। वहीं इमरजेंसी वार्ड में भी रोजाना 150 से 200 मरीज आ रहे हैं, जबकि अस्पताल की कुल क्षमता मात्र 1,000 बिस्तरों की है।
जांच के लिए लंबा इंतजार: अस्पताल में सिर्फ बेड ही नहीं, बल्कि मेडिकल टेस्ट के लिए भी लंबी कतारें लगी हैं। MRI, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी जैसी जांचों के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
गंभीर मरीजों पर दोहरी मार
संस्थान में ब्रेन हेमरेज, लिवर की बीमारियों, हृदय रोग और गंभीर मधुमेह (शुगर) से पीड़ित मरीजों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन संसाधन कम होने के कारण इन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। मजबूरन, कई परिजन अपने मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों में ले जाने को विवश हैं।
निजी लैब का बढ़ता बोझ
सरकारी व्यवस्था में जांच रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी के कारण मरीज निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा ले रहे हैं। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है।
निष्कर्ष: रायपुर एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले बुनियादी ढांचे (Infrastucture) का विस्तार न होना चिंता का विषय है। फिलहाल, मरीजों को बेहतर इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
















