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युवाओं में अचानक बढ़ते हार्ट अटैक का मुख्य कारण हो सकता है डायबिटीज : विशेषज्ञों की चेतावनी

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। आजकल जिम में वर्कआउट करते हुए या नाचते-गाते अचानक दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया शोधों के अनुसार, इन घटनाओं के पीछे ‘मधुमेह’ (डायबिटीज) एक बड़ा और छुपा हुआ कारण हो सकता है। खराब खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते युवा आबादी में डायबिटीज के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि अधिकांश युवाओं को इस बात का भान ही नहीं होता कि वे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं।

डायबिटीज से होने वाले गंभीर खतरे

डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा दो से तीन गुना तक अधिक होता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है, जैसे:

नसों का नुकसान: पैरों में न्यूरोपैथी और गंभीर संक्रमण का खतरा।

अंधापन: मधुमेह रेटिनोपैथी के कारण दृष्टि प्रभावित होना।

अंग विफलता: किडनी (गुर्दे) का काम करना बंद कर देना।

विशेषज्ञों की राय और आगामी समाधान

इस गंभीर स्वास्थ्य चुनौती पर मंथन करने के लिए अगले महीने दिल्ली में ‘लोटस डायबिटीज फाउंडेशन’ का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें दुनियाभर के विशेषज्ञ मधुमेह के आधुनिक उपचार और इसे जड़ से खत्म करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

गुरु तेग बहादुर अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक और सम्मेलन के वैज्ञानिक सदस्य, डॉ. रजत झाम्ब का कहना है कि युवा हार्ट अटैक के मामलों की जांच करने पर अक्सर मधुमेह की पुष्टि होती है। यह स्पष्ट है कि डायबिटीज ही दिल की समस्याओं को बढ़ावा दे रही है। अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025 तक भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या सात करोड़ को पार कर सकती है।

जागरूकता का अभाव और बचाव

देश में मधुमेह को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। शोध बताते हैं कि करीब आधे मरीजों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें शुगर की बीमारी है। जब वे किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के लिए जांच कराते हैं, तब जाकर उन्हें इस स्थिति का पता चलता है।

डॉ. झाम्ब के अनुसार, डायबिटीज तब होती है जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर उत्पादित इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इंसुलिन रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हार्मोन है। अतः नियमित जांच ही इससे होने वाले खतरों से बचाव का एकमात्र रास्ता है।

डायबिटीज के मुख्य प्रकार

टाइप 1: यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों और किशोरों में अधिक सामान्य है। इसमें शरीर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता, इसलिए रोजाना इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।

टाइप 2: यह वयस्कों में होने वाली सबसे सामान्य प्रकार की डायबिटीज है (कुल मामलों का 90%)। अच्छी जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

गर्भावधि (Gestational) डायबिटीज: यह गर्भावस्था के दौरान रक्त शर्करा बढ़ने से होती है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। हालांकि यह आमतौर पर प्रसव के बाद ठीक हो जाती है, लेकिन भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बना रहता है।

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