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यूएई पर हमले पर भारत का कड़ा रुख : पीएम मोदी ने की निंदा, कहा- ‘संकट के समय हम यूएई के साथ’

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा शहर में हुए हमले की तीखी निंदा की है। इस घटना में तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई है, जिसके प्रति प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इस कठिन परिस्थिति में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है।

हमले की गंभीरता और भारत का रुख

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फुजैरा स्थित एक प्रमुख तेल संयंत्र को निशाना बनाकर यह हमला किया गया था। यूएई प्रशासन ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की बात कही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे (civilian infrastructure) पर हमला करना पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कृत्यों की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की जानी चाहिए।

पीएम मोदी ने भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि भारत कूटनीति और बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है। साथ ही, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक संवेदनशील समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। यहाँ तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों के उछाल और ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों का आवागमन काफी प्रभावित हुआ है।

तनाव के प्रमुख बिंदु:

दावे और प्रतिदावे: अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने दो व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकाला है, जबकि ईरान ने इन दावों को नकारा है।

रक्षा तंत्र: यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उन्होंने ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों को अपने वायु रक्षा तंत्र के जरिए विफल कर दिया।

अमेरिकी प्रतिक्रिया: रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों को बचाने के लिए अमेरिका ने ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

इस हमले के बाद दुनिया भर के नेताओं ने चिंता व्यक्त की है। इमैनुएल मैक्रॉ और सर कीर स्टारमर सहित कई वैश्विक नेताओं ने इस घटना को अन्यायपूर्ण करार दिया है और खाड़ी देशों में शांति बहाली के लिए अपने सहयोगियों के साथ खड़े रहने की बात कही है।

फुजैरा के तेल बंदरगाह पर लगी आग ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बावजूद, हालिया घटनाओं ने क्षेत्र में अस्थिरता का नया दौर शुरू कर दिया है।

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