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क्या आपका हैंडशेक आपकी सेहत का सच बता रहा है? जानिए विशेषज्ञों की राय

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। हाथ मिलाना एक सामाजिक शिष्टाचार है, जिसका उपयोग हम अक्सर अभिवादन करने, सम्मान देने या दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका हाथ मिलाने का तरीका केवल एक अभिवादन नहीं, बल्कि आपकी सेहत का एक महत्वपूर्ण ‘हेल्थ इंडिकेटर’ भी हो सकता है? चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, आपके हैंडशेक की ताकत और स्थिति आपके शरीर में छिपी कई समस्याओं का संकेत दे सकती है।

आइए जानते हैं कि विशेषज्ञों के अनुसार, हाथ मिलाने का तरीका किन गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों की ओर इशारा करता है:

  1. हृदय रोगों का संकेत

क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन द्वारा की गई एक शोध के अनुसार, हाथ की कमजोर पकड़ (Weak Grip) भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक या स्ट्रोक का संकेत हो सकती है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने लगभग 5,000 लोगों पर अध्ययन किया और पाया कि जिन लोगों की ग्रिप स्ट्रेंथ कमजोर थी, उनमें हृदय संबंधी बीमारियां होने का खतरा अधिक था। प्रोफेसर स्टीफन पीटरसन के मुताबिक, हाथ की पकड़ को हृदय स्वास्थ्य मापने का एक सरल और प्रभावी तरीका माना जा सकता है।

  1. डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि कमजोर हैंडशेक का संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी हो सकता है। 45 वर्ष से अधिक उम्र के 51,000 से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में यह देखा गया कि जो लोग अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहे थे, उनकी पकड़ अक्सर कमजोर थी। इसका मुख्य कारण यह है कि डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति शारीरिक रूप से थकान और कमजोरी महसूस करता है, जो सीधे तौर पर उसकी पकड़ की ताकत को प्रभावित करती है।

  1. गठिया और डिमेंशिया (Arthritis & Dementia)

फार्मासिस्ट इयान बड का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की पकड़ समय के साथ ढीली पड़ रही है, तो यह उसकी शारीरिक क्षमता में गिरावट का संकेत हो सकता है। गठिया (Arthritis) और डिमेंशिया जैसी स्थितियां शरीर की मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं, जिससे व्यक्ति की पकड़ कमजोर होने लगती है।

  1. हाइपरहाइड्रोसिस (हथेलियों में पसीना)

डॉ. सुहैल हुसैन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की हथेलियों में लगातार बहुत अधिक पसीना आता है, तो इसे ‘हाइपरहाइड्रोसिस’ कहा जाता है। यह स्थिति अक्सर हमारे नर्वस सिस्टम के अधिक सक्रिय होने का संकेत देती है, जो अत्यधिक तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन के कारण हो सकता है।

  1. जीवन प्रत्याशा और मृत्यु का जोखिम

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक ऐतिहासिक शोध (1951-1976) ने चौंकाने वाले परिणाम दिए थे। इस अध्ययन में पाया गया कि मध्यम आयु में कमजोर हैंडशेक होने से हृदय रोग, सांस संबंधी समस्याओं और कैंसर से मृत्यु का जोखिम 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। यह स्पष्ट करता है कि शरीर की मजबूती और पकड़ का सीधा संबंध दीर्घायु से है।

हैंडशेक के दौरान महसूस होने वाली कमजोरी या अन्य बदलाव केवल उम्र का असर नहीं, बल्कि शरीर द्वारा दी गई एक चेतावनी हो सकती है। यदि आपको अपने हाथ मिलाने के तरीके में या अपनी ग्रिप में किसी तरह का बदलाव महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। बेहतर होगा कि किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और समय रहते अपनी सेहत की जांच करवाएं।

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