सुशासन तिहार’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ से ग्रामीणों के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रशासनिक सक्रियता और जन-कल्याणकारी नीतियों का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच और कलेक्टर अमित कुमार के कुशल निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष शिविर ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। ‘सुशासन तिहार’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के मेल से शुरू हुई इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं की पहुंच को सीधे जनता के दरवाजे तक सुनिश्चित करना है।
गादीरास शिविर: स्वास्थ्य सेवाओं का मिला सीधा लाभ
गादीरास में आयोजित क्लस्टर स्तरीय शिविर में स्वास्थ्य विभाग ने सक्रिय भूमिका निभाई। यहाँ न केवल ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई, बल्कि मौके पर ही आयुष्मान भारत कार्ड और आभा (ABHA) आईडी भी तैयार की गई।
इस शिविर की सफलता की एक मर्मस्पर्शी झलक तब देखने को मिली जब सोनाकुकानार ग्राम के नन्हे बालक इंदुनाथ का आयुष्मान कार्ड बिना किसी देरी के बनाकर उसके माता-पिता को सौंपा गया। स्वास्थ्य सुरक्षा का यह मजबूत कवच मिलने से बच्चे का परिवार बेहद भावुक और निश्चिंत नजर आया। उन्होंने इस त्वरित प्रशासनिक मदद के लिए आभार व्यक्त किया।
देवी चौक पर त्वरित कार्रवाई: नेहा को मिला श्रम कार्ड
इसी तरह का एक और सफल आयोजन सुकमा के देवी चौक पर हुआ। यहाँ श्रम कार्ड बनवाने आई स्थानीय निवासी नेहा नाग को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई। अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल उनके दस्तावेजों की जांच की और मौके पर ही श्रम कार्ड बनाकर उनके हाथों में सौंप दिया। नेहा ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बिना किसी परेशानी के इतनी जल्दी सरकारी सेवा मिलना उनके लिए एक सुखद अनुभव है।
एक ही छत के नीचे कई प्रशासनिक सेवाओं का समाधान
जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इन शिविरों का सबसे बड़ा फायदा यह हो रहा है कि लोगों को बुनियादी जरूरी कागजात बनवाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा है। इन शिविरों में निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता के आधार पर तुरंत निपटाए जा रहे हैं:
राजस्व मामले: भूमि का नामांतरण, आपसी बंटवारा और सीमांकन।
महत्वपूर्ण दस्तावेज: आय, जाति, निवास और राशन कार्ड का निर्माण।
नागरिक पंजीकरण: जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण से जुड़े मामलों का ऑन-स्पॉट निपटारा।
सुकमा जिले में आयोजित हो रहे ये सुशासन शिविर इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो योजनाएं कागजों से निकलकर सीधे जनता के जीवन को संवारने लगती हैं। इस जमीनी प्रयास ने सुदूर वनांचल के ग्रामीणों के भीतर सरकार और व्यवस्था के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है।
















