छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री की पहल से जशपुर की महिलाएं बनेंगी ‘ड्रोन दीदी’, ड्रोन से उर्वरक व कीटनाशक का वैज्ञानिक छिड़काव, कम लागत में होगी बेहतर खेती

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और खेती-किसानी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एक बेहतरीन शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में जशपुर जिले के महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को एक नई और खास पहचान मिल रही है। ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के अंतर्गत चुनी गई ये महिलाएँ इन दिनों रायपुर की आईटीएम यूनिवर्सिटी में आधुनिक ड्रोन उड़ाने और रिमोट पायलटिंग का कड़ा प्रशिक्षण ले रही हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ तकनीक सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें कृषि के क्षेत्र में रोजगार और बिजनेस के नए मौके देना है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ये महिलाएँ खेतों में आधुनिक सेवाएं देने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगी।

ट्रेनिंग में क्या सीख रही हैं महिलाएँ?

इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को ड्रोन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी जा रही है, जैसे:

ड्रोन की बनावट और उसकी तकनीकी समझ।

सुरक्षित तरीके से उड़ान भरना और रिमोट कंट्रोल संभालना।

खेतों में फसलों पर वैज्ञानिक तरीके से खाद और कीटनाशकों का छिड़काव करना।

ड्रोन की देखरेख और उसका रख-रखाव करना।

किसानों और महिलाओं दोनों को होगा बड़ा फायदा

जब ये ‘ड्रोन दीदियां’ ट्रेनिंग पूरी करके जशपुर लौटेंगी, तो वहाँ के किसानों को नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी आधुनिक सुविधाएँ मिलेंगी। ड्रोन की मदद से खेतों में छिड़काव करने से समय की भारी बचत होगी, दवाइयों और खाद की लागत कम आएगी और फसलों पर इसका असर भी ज्यादा होगा। इससे इलाके में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर दौरे के समय इन महिलाओं को हरी झंडी दिखाकर प्रशिक्षण के लिए रवाना किया था। इससे पहले अप्रैल 2026 में हुए ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम में भी महिलाओं को ड्रोन और मिट्टी जाँच की उन्नत मशीनें सौंपी गई थीं।

कृषि विभाग और प्रशासन को बड़ी उम्मीदें

जशपुर के कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ट्रेनिंग के बाद ये ड्रोन दीदियां जिले के अलग-अलग गांवों में जाकर किसानों की मदद करेंगी। इससे न केवल खेती की लागत घटेगी और पैदावार बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की कमाई में भी इजाफा होगा। महिलाओं को तकनीक से जोड़कर स्वावलंबी बनाने की यह मुहिम जशपुर की खेती और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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