राम मंदिर दान चोरी मामला, “इन कलयुगी रावणों ने लाखों भक्तों की आस्था चुराई है” : धीरेंद्र शास्त्री

अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब काफी गरमा गया है। इस पूरे विवाद पर बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने इस कृत्य की तुलना रामायण काल से करते हुए कहा कि आज के दौर में भी रावण मौजूद हैं, बस उनका स्वरूप बदल गया है। पौराणिक काल में रावण ने माता सीता का हरण किया था, लेकिन इन आधुनिक रावणों ने राम मंदिर के दानपात्र से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास को चुराया है। धीरेंद्र शास्त्री ने संतोष व्यक्त किया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उम्मीद जताई कि गहन जांच के बाद बाकी दोषी भी जल्द ही कानून की गिरफ्त में होंगे।
उन्होंने आगे कहा कि सत्य को कभी छिपाया नहीं जा सकता। जिस तरह सीता जी का हरण करने वाले रावण के पूरे वंश का सर्वनाश हो गया था, ठीक उसी तरह राम मंदिर में चोरी करने वालों का हश्र भी बुरा होगा। उन्हें न केवल देश का कानून और प्रशासन दंडित करेगा, बल्कि भगवान के दरबार में भी उन्हें इसका महादंड भुगतना पड़ेगा।
एसआईटी (SIT) की कार्रवाई: 8 आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे घोटाले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली इस समिति ने शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है, जिसमें 8 लोगों को नामजद और कुछ अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नामजद सभी आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
अविनाश शुक्ला
अनुकल्प मिश्रा
लवकुश मिश्रा
मनीष कुमार यादव
करुणेश पांडेय
रमाशंकर मिश्रा
सुभाष श्रीवास्तव
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है और पुलिस इनसे आगे की पूछताछ कर रही है।
“बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश” — संतोष दुबे के गंभीर आरोप
जैसे-जैसे इस मामले में गिरफ्तारियां हो रही हैं, वैसे-वैसे इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज होती जा रही है। बाबरी ढांचा विध्वंस मामले से जुड़े रहे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दुबे ने इस पूरी जांच और राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संतोष दुबे का आरोप है कि प्रशासन केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों या निचले अधिकारियों पर कार्रवाई करके मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि बड़े नीति-निर्माताओं को बचाया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों — चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव — की जवाबदेही पर सवाल उठाए। दुबे ने मांग की है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और यदि ट्रस्ट के शीर्ष स्तर पर भी किसी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो कानून सबके लिए समान होना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक कहा कि इस सच्चाई को सामने लाने के लिए वे सत्ता परिवर्तन तक की बात से पीछे नहीं हटेंगे।
















