अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता बेनतीजा : कतर की कोशिशें नाकाम, कूटनीति के मोर्चे पर बढ़ी तनातनी

नई दिल्ली (एजेंसी)। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनाव को दूर करने के लिए कतर की ओर से की गई मध्यस्थता फिलहाल सफल नहीं हो पाई है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठकों के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी है। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, जिससे कूटनीतिक हल निकालने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।
कतर के प्रस्ताव पर लंबी चर्चा
कतर के मुख्य मध्यस्थ अली अल-थवादी ने न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी मैराथन बैठक की। इस दौरान कतर की ओर से तैयार किए गए एक दो-पन्ने के समझौते के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान की उस मांग का हल निकालना था जिसमें अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाने की बात कही गई है, साथ ही इसमें अमेरिका की वह शर्त भी शामिल थी जिसके तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करना है।
इसके बाद अली अल-थवादी ने वॉशिंगटन पहुंचकर अमेरिकी अधिकारियों और ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर से भी मुलाकात की। इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी शामिल होने की खबर है, हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार किया है।
व्हाइट हाउस की उम्मीदों पर फिरा पानी
सोमवार की सुबह अमेरिकी प्रशासन का रुख इस बातचीत को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहा था। अधिकारियों ने मीडिया को जानकारी दी थी कि वार्ता रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और यदि ईरान परमाणु मामलों में नरमी बरतता है, तो अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और फ्रीज किए गए फंड को बहाल करने पर विचार कर सकता है।
लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका ने ईरान को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। इस बयान के बाद बातचीत की पूरी दिशा ही बदल गई।
दोनों तरफ से तीखे तेवर और आरोप
सूत्रों का कहना है कि वार्ताओं में कोई सार्थक प्रगति नहीं हो पाई क्योंकि ईरान ऐसी मांगें रख रहा है जिन्हें अमेरिका मानने को तैयार नहीं है, वहीं अमेरिकी पक्ष का मानना है कि इस स्थिति में उसे किसी समझौते की कोई आवश्यकता नहीं है। इस बीच पाकिस्तान और मिस्र जैसे अन्य मध्यस्थ देशों ने भी ईरान पर परमाणु कार्यक्रमों में रियायत देने का दबाव बनाया है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा है कि ईरान ने अपनी शर्तें पहुंचा दी हैं लेकिन अमेरिकी नेतृत्व कोई ठोस निर्णय लेने में असमर्थ नजर आ रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान को हर हाल में परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाएगा और जरूरत पड़ने पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
















