वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है सभी का कल्याण : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर (एजेंसी)। गोरखपुर में आयोजित एक सप्त दिवसीय व्याख्यान समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंथ और उपासना पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं, लेकिन सभी का कल्याण केवल वृहद सनातन धर्म की सुदृढ़ता और एकता में ही निहित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के 140 करोड़ नागरिकों का एक स्वर में एकजुट होना किसी भी चुनौती या बाहरी ताकत को परास्त करने के लिए पर्याप्त है।
सांस्कृतिक स्वतंत्रता और महापुरुषों का योगदान
मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं मानते थे, बल्कि उनका मानना था कि पूर्ण स्वाधीनता के लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी उतनी ही आवश्यक है। सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार की तर्ज पर अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर की स्थापना उसी वैचारिक संघर्ष का परिणाम है, जो आज 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद साकार हुआ है।
विकास और सेवा के क्षेत्र में गोरक्षपीठ की भूमिका
सीएम योगी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या और विंध्यवासिनी धाम के साथ-साथ प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजन सनातन संस्कृति के गौरव को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित कर रहे हैं। शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि 1932 में स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में महंत दिग्विजयनाथ का अहम योगदान रहा। आज यह परिषद विभिन्न शिक्षण संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के माध्यम से समाज के हर वर्ग को सशक्त बना रही है। अंत में उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ जाति, पंथ और संप्रदाय से ऊपर उठकर संपूर्ण सनातन समाज की सेवा और समरसता के लिए समर्पित है।
















