भारत में बढ़ता हृदय रोगों का खतरा : विशेषज्ञों ने दिए जीवनशैली सुधारने और समय पर जांच के सुझाव

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। भारत में दिल के दौरे और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि लोग समय पर नियमित जांच करवाएं, स्वास्थ्य में सुधार लाएं और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो इन मौतों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
29 सितंबर को ‘विश्व हृदय दिवस’ के अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि मानव हृदय बेहद मजबूत अंग है, जो औसतन 70 वर्षों में लगभग 2.5 अरब बार धड़कता है। इसके बावजूद, आधुनिक खानपान और खराब जीवनशैली के कारण इस पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
युवाओं में बढ़ता जोखिम और प्रमुख कारण
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन (हृदय विज्ञान) डॉ. अशोक सेठ के अनुसार, युवाओं में मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण हृदय रोगों का जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने सचेत किया कि धमनियों में होने वाली मामूली रुकावट भी मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल के दौरे अचानक नहीं पड़ते। अक्सर मरीज को कई दिन या हफ्ते पहले से सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक थकान जैसे संकेत मिलते हैं, जिन्हें लोग अक्सर मामूली मानकर अनदेखा कर देते हैं।
बीमारियों की ‘तिगुनी चुनौती’
इसी संस्थान के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी प्रमुख डॉ. अतुल माथुर का कहना है कि भारत में मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की तिकड़ी धमनियों को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती है। यही आगे चलकर अचानक ब्लॉकेज का कारण बनती है। हालांकि, सही कदम उठाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बचाव के प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार हृदय को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित आदतों को अपनाना जरूरी है:
नियमित व्यायाम: रोजाना शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
संतुलित आहार: पौष्टिक भोजन का सेवन करें और वजन नियंत्रित रखें।
व्यसन से दूरी: तंबाकू और धूम्रपान से पूरी तरह परहेज करें।
नियमित हेल्थ चेकअप: समय-समय पर दिल की सेहत और ब्लड प्रेशर/शुगर की जांच कराएं।
विश्व स्तर पर हर साल हृदय संबंधी बीमारियों से करीब 2.05 करोड़ से अधिक लोग अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से अधिकतर मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण होती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि सतर्कता और स्वस्थ आदतों से इनमें से 80 प्रतिशत तक मौतों को रोका जा सकता है।
















