छत्तीसगढ़

बस्तर की जैविक वनोपज अब अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में जमाएगी धाक : इमली, महुआ और आम को मिला NPOP ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन

बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी केवल अशांति और उग्रवाद की खबरों तक सीमित माना जाता था, अब अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा के बल पर विकास की नई गाथा लिख रहा है। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की विशेष पहल और मार्गदर्शन में बस्तर की जनजातीय महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है।

दंतेवाड़ा स्थित ‘मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड’ को भारत सरकार के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत आधिकारिक तौर पर जैविक प्रमाणपत्र (Organic Certification) प्रदान किया गया है। छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGCERT) द्वारा दी गई यह मान्यता राज्य में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इसके माध्यम से बस्तर के वनों से एकत्र की जाने वाली इमली, महुआ और आम (अमचूर व आम पापड़) को अब राष्ट्रीय और वैश्विक गुणवत्ता मानकों की मुहर मिल गई है।

विकास की मुख्य झलकियां

बिचौलियों से मुक्ति और बेहतर दाम: जैविक प्रमाणीकरण मिलने से अब बस्तर की यह वनोपज सीधे दिल्ली के बड़े ऑर्गेनिक स्टोर्स और विदेश के बाजारों तक पहुंचेगी। इससे स्थानीय संग्रहकर्ताओं को उचित और बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

महिला सशक्तिकरण का बढ़ता दायरा: वर्तमान में इस FPO से लगभग 930 आदिवासी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। जल्द ही इस नेटवर्क का विस्तार कर सदस्यों की संख्या 2,100 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

विभागीय मार्गदर्शन: प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व और CGCERT के CEO अनिमेष गोवर्धन के तकनीकी सहयोग से इस प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सफलता से पूरा किया गया।

भविष्य की योजना: वन विभाग की योजना इस पहल का दायरा बढ़ाकर बस्तर संभाग के करीब 10,000 अन्य किसानों और महिला FPO तक ले जाने की है।

केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से बस्तर में शांति के साथ-साथ आजीविका के नए द्वार खुल रहे हैं। इस ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से न केवल आदिवासी महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि बस्तर की प्राकृतिक पहचान भी वैश्विक मंच पर और मजबूत होगी।

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