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नक्सलवाद के खात्मे की ओर एक बड़ा कदम, शीर्ष कमांडर पापा राव का आत्मसमर्पण

बस्तर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से जारी नक्सल विरोधी अभियानों में मंगलवार, 24 मार्च का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। राज्य में सक्रिय अंतिम बड़े नक्सली कमांडर पापा राव ने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। वह अपने दर्जन भर सहयोगियों के साथ बीजापुर मुख्यालय की ओर बढ़ रहा है।

हथियारों का जखीरा और मजबूत प्रभाव

सूत्रों के अनुसार, पापा राव के साथ उसके साथियों के पास एके-47 और एसएलआर जैसे घातक हथियार मौजूद हैं। दोरला जनजाति से ताल्लुक रखने वाला पापा राव ‘दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी’ (DKSZC) में एक महत्वपूर्ण रैंक पर तैनात था। वह लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बना हुआ था और कई मुठभेड़ों में चकमा देकर बच निकलने में कामयाब रहा था। जानकारों का मानना है कि उसके सरेंडर करने से छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का सपना जल्द ही हकीकत में बदल सकता है।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बड़ा बयान

प्रदेश के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना को राज्य में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत की शुरुआत बताया है। कवर्धा में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पापा राव के आत्मसमर्पण के बाद छत्तीसगढ़ में अब कोई भी बड़ा नक्सली नेता नहीं बचा है। सरकार ने इस घटना को बड़ी उपलब्धि करार दिया है। गौरतलब है कि पापा राव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

कौन है पापा राव?

पहचान: पापा राव उर्फ मंगू, उम्र लगभग 56 वर्ष।

मूल निवासी: सुकमा जिला, छत्तीसगढ़।

पद: नक्सली संगठन में DKSZCM सदस्य, पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का हिस्सा।

विशेषज्ञता: पापा राव को बस्तर के दुर्गम इलाकों की गहरी जानकारी है, जिसके कारण वह सालों से सुरक्षाबलों को गुमराह करने में सफल रहा।

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