दिमाग को कमजोर कर सकती है अल्जाइमर की बीमारी, इन 7 शुरुआती संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। अल्जाइमर एक गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार है जो मुख्य रूप से डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का रूप लेकर बढ़ती उम्र के लोगों (विशेषकर 65 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग) को प्रभावित करता है। इस स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाएं और ऊतक धीरे-धीरे डी-जेनरेट होकर नष्ट होने लगते हैं, जिससे व्यक्ति की सोचने की क्षमता, याद्दाश्त और दैनिक कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है। चूंकि इसके लक्षण वर्षों पहले अंदर ही अंदर पनपने लगते हैं, इसलिए समय रहते इसकी पहचान करना बहुत जरूरी है। इस बीमारी के 7 प्रमुख शुरुआती लक्षण निम्नलिखित हैं:
याद्दाश्त का बार-बार कमजोर होना: सामान्य रूप से चीजें भूलना आम बात है, लेकिन अल्जाइमर से पीड़ित लोग अक्सर अहम चीजें जैसे फोन, पैसे या हाल ही में की गई बातचीत को पूरी तरह भूल जाते हैं और उन्हें दोबारा याद करने में असमर्थ रहते हैं।
हिसाब-किताब या गणना में कठिनाई: रोजमर्रा के पैसों की गिनती करना, बिल चुकाना या साधारण गणितीय गणनाएं करना भी इस रोग से ग्रसित व्यक्ति के लिए मुश्किल हो जाता है।
मूड स्विंग्स और तनाव: पीड़ित व्यक्ति के स्वभाव में अचानक बदलाव आने लगता है। डिप्रेशन या मानसिक तनाव इस बीमारी के शुरुआती दौर में अक्सर इंसान को घेर लेते हैं।
निर्णय लेने में असमर्थता: अल्जाइमर से ग्रस्त मरीज को अपने दैनिक जीवन या किसी भी स्थिति में स्वतंत्र रूप से सही फैसले लेने में भारी उलझन का सामना करना पड़ता है।
एकाग्रता का अभाव: ऐसे मरीजों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वे किसी भी काम पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं रख पाते। जो काम वे पहले चुटकियों में कर लेते थे, अब उन्हें उनमें भी परेशानी होती है।
बातचीत करने में परेशानी: संवाद के दौरान उचित शब्दों को तलाशने, वाक्यों को पूरा करने या सही उच्चारण करने में कठिनाई होना भी इसका एक बड़ा संकेत है।
अचानक बेचैनी और भ्रम: बीमारी बढ़ने पर मरीज की बेचैनी बढ़ जाती है, जिसके कारण कई बार वे अपने सबसे करीबी लोगों को भी पहचानने में धोखा खा जाते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें कई बार मतिभ्रम (Hallucinations) जैसी स्थितियां भी महसूस होने लगती हैं।
















