ट्रम्प के कड़े रुख के बीच भारत-कनाडा संबंधों में नई गर्माहट : प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दौरे पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली (एजेंसी)। कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही भारत और कनाडा के बीच जमे हुए राजनयिक संबंधों की बर्फ अब पिघलने लगी है। जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान आई कड़वाहट को पीछे छोड़ते हुए, वर्तमान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अब भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के पीछे अमेरिका की बदलती विदेश नीति का बड़ा हाथ है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कनाडा पर टैरिफ लगाने की धमकियों और कनाडा के अस्तित्व को लेकर दिए गए विवादास्पद बयानों के बाद, ओटावा अब नई दिल्ली की ओर मजबूती से हाथ बढ़ा रहा है।
ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े समझौतों की उम्मीद
हाल ही में गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच टेलीफोन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु प्रधानमंत्री कार्नी की आगामी भारत यात्रा है।
इस प्रस्तावित दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय समझौतों पर मुहर लग सकती है:
ऊर्जा सुरक्षा: एलएनजी (LNG) और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर सहयोग।
परमाणु ईंधन: यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी।
महत्वपूर्ण खनिज: आधुनिक तकनीक और चिप निर्माण के लिए जरूरी ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर गठबंधन।
कूटनीतिक सक्रियता और व्यापारिक संवाद
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार के संकेत केवल बयानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धरातल पर भी दिख रहे हैं:
गोवा एनर्जी वीक: कनाडा के ऊर्जा मंत्री होजीसन इस सप्ताह गोवा में भारतीय केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात करेंगे।
व्यापारिक वार्ता: दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर औपचारिक बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई है।
सांस्कृतिक जुड़ाव: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा कनाडा में भारतीय समुदाय और हिंदू कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी ने भी विश्वास बहाली में बड़ी भूमिका निभाई है।
निष्कर्ष: जहाँ पिछले कुछ वर्षों में विवाद हावी रहे, वहीं अब दोनों देश आर्थिक हितों और वैश्विक स्थिरता के लिए एक-दूसरे की जरूरत को समझ रहे हैं। पीएम कार्नी का यह दौरा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नए कूटनीतिक अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
















