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बजट 2026-27 : ‘आत्मनिर्भर और आधुनिक भारत’ की नई ब्लूप्रिंट

नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। इस बजट का मुख्य उद्देश्य भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने की दिशा में तेजी से आगे ले जाना है। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर दिए गए अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती और सुधारों के कारण दुनिया में चमक रही है।

बजट के तीन मुख्य स्तंभ
सरकार ने इस बार के बजट को युवाओं की ऊर्जा और उम्मीदों को समर्पित किया है। इसे तीन प्रमुख लक्ष्यों पर आधारित किया गया है:

तीव्र विकास: आर्थिक प्रगति की रफ्तार को न केवल बढ़ाना बल्कि उसे स्थिर रखना।

सशक्त नागरिक: लोगों के कौशल का विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।

समावेशी दृष्टिकोण: समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुँचाना।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का विस्तार

देश के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का प्रावधान किया है।

हाई-स्पीड रेल: दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे सात नए कॉरिडोर पर काम तेज होगा।

जलमार्ग: अगले पांच वर्षों में 20 नए नेशनल वॉटरवेज शुरू किए जाएंगे।

निजी निवेश: बुनियादी ढांचे में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक विशेष ‘रिस्क गारंटी फंड’ बनाया गया है।

तकनीक और रणनीतिक सेक्टर पर दांव

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने हाई-टेक इंडस्ट्रीज पर बड़ा निवेश करने का फैसला किया है:

सेमीकंडक्टर: भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए 40,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

बायो-फार्मा: इस क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ तीन नए राष्ट्रीय संस्थान खोले जाएंगे।

AI का उपयोग: खेती में सुधार के लिए ‘भारत-विस्तार’ नामक एआई-आधारित कार्यक्रम की घोषणा की गई है।

रोजगार और कौशल विकास

शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.5 लाख केयर गिवर्स और एक लाख से अधिक प्रोफेशनल्स को तैयार करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में पांच क्षेत्रीय हब बनाए जाएंगे।

आर्थिक सेहत (राजकोषीय स्थिति)

वित्त मंत्री के अनुसार, सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में सफल रही है। इस वर्ष राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 4.3% रहने का अनुमान है, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

निष्कर्ष: यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि तकनीक, बुनियादी ढांचे और ग्रामीण सशक्तिकरण के जरिए भारत को वैश्विक शक्ति बनाने का एक ठोस रोडमैप है।

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