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बजट 2026-27: ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ से युवाओं को मिलेगा रोजगार, आयुष क्षेत्र में खुलेंगे तीन नए AIIA

नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 में देश की रचनात्मक शक्ति और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) और आयुष सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की है।

क्रिएटिव सेक्टर में 20 लाख नौकरियों का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र को भविष्य का उभरता हुआ उद्योग बताया। सरकार का अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। इसी मांग को पूरा करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं:

लैब की स्थापना: देशभर के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में विशेष कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाई जाएंगी।

संस्थानों को समर्थन: मुंबई स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी’ के माध्यम से इन लैब्स को तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।

कौशल विकास: इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को डिजिटल और क्रिएटिव स्किल्स में माहिर बनाना है ताकि वे वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

विशेषज्ञों का मत: ऑरेंज इकोनॉमी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, डिजिटल इनोवेशन और रचनात्मकता का एक ऐसा मिश्रण है जो आर्थिक विकास को नई गति देगा।

आयुर्वेद को मिली वैश्विक पहचान: तीन नए संस्थान

स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेषकर पारंपरिक चिकित्सा को मजबूती देने के लिए बजट में आयुष सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि:

देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) स्थापित किए जाएंगे।

आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण (Upgradation) किया जाएगा।

जामनगर स्थित ‘WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन’ को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा ताकि भारत पारंपरिक चिकित्सा में विश्व का नेतृत्व कर सके।

कोविड-19 के बाद वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने परीक्षण सुविधाओं और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है।

बजट 2026-27 यह स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल पारंपरिक उद्योगों पर निर्भर नहीं है। युवा शक्ति, रचनात्मक उद्योग और प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर सरकार ने ‘विकसित भारत’ की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया है।

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