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लोकतंत्र और जन-अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुटता का आह्वान : मल्लिकार्जुन खरगे

नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि आज देश के लोकतंत्र और गरीबों के अधिकारों पर गहरा संकट मंडरा रहा है। पार्टी की कार्यसमिति (CWC) की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा जैसी जनहितकारी योजनाओं को कमजोर करना और संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना तानाशाही के संकेत हैं।

खरगे के संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

मनरेगा के लिए बड़े आंदोलन की तैयारी: उन्होंने कहा कि मनरेगा को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है। जिस प्रकार किसानों ने एकजुट होकर काले कृषि कानूनों को वापस लेने पर सरकार को विवश किया था, ठीक उसी तर्ज पर मनरेगा की पूर्ण बहाली के लिए अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आवश्यकता है।

संस्थाओं का दुरुपयोग: खरगे ने आरोप लगाया कि सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष की छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया।

वंचित वर्गों की उपेक्षा: उन्होंने चिंता व्यक्त की कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के साथ हो रही क्रूरता बढ़ती जा रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे माध्यमों से लोगों को उनके मताधिकार से दूर रखने की साजिश रची जा रही है।

तानाशाही के विरुद्ध रणनीति: कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार गरीबों के हक छीनकर संविधान विरोधी कार्य कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विपक्ष को एक ठोस और प्रभावी रणनीति तैयार करनी होगी।

खरगे ने कार्यकर्ताओं और नेताओं का आह्वान किया कि वे जनता के बीच जाकर सरकार की इन जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करें और अधिकारों की इस लड़ाई को तेज करें।

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