चंद्रयान-4 : चांद से मिट्टी लाने की तैयारी, इसरो ने चुन ली है लैंडिंग साइट

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने अगले ऐतिहासिक पड़ाव, चंद्रयान-4 के लिए तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) ने इस जटिल मिशन के लिए चंद्रमा पर उतरने की सटीक जगह की पहचान कर ली है। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा क्योंकि यह इसरो का पहला ‘रिटर्न मिशन’ होगा, जिसका लक्ष्य चांद की सतह से नमूने लेकर सुरक्षित धरती पर वापस आना है।
लैंडिंग के लिए ‘एमएम-4’ (MM-4) साइट का चुनाव
वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरों का गहन विश्लेषण करने के बाद लैंडिंग साइट तय की है। अध्ययन में चार संभावित स्थानों पर विचार किया गया था, जिनमें से ‘एमएम-4’ नामक स्थान को सबसे सुरक्षित माना गया है।
सटीक लोकेशन: यह स्थान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित ‘नॉविस माउंटेन’ (Novis Mountain) के पास है।
क्षेत्रफल: लैंडिंग के लिए लगभग 1 वर्ग किलोमीटर का इलाका चिन्हित किया गया है।
विशेषता: यह क्षेत्र समतल है, जिससे लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने का जोखिम कम है। साथ ही, यहाँ पर्याप्त सौर ऊर्जा (धूप) उपलब्ध है और बड़े गड्ढों की कमी है, जिससे रोवर को चलने में आसानी होगी।
मिशन की संरचना और मॉड्यूल
चंद्रयान-4 तकनीक के मामले में चंद्रयान-3 से कहीं अधिक उन्नत होगा। इसमें कुल पांच प्रमुख मॉड्यूल शामिल होंगे:
प्रोपल्शन मॉड्यूल: मिशन को चंद्रमा तक ले जाने के लिए।
डिसेंडर मॉड्यूल: चांद की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग के लिए।
असेंडर मॉड्यूल: सतह से नमूने लेकर वापस उड़ान भरने के लिए।
ट्रांसफर मॉड्यूल: चंद्रमा की कक्षा से धरती की ओर वापसी के लिए।
री-एंट्री मॉड्यूल: नमूनों के साथ पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश के लिए।
भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन?
चंद्रयान-4 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की मिट्टी (Regolith) और पत्थरों के नमूने एकत्र करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में पानी और बर्फ के महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए जीवनदायिनी साबित होंगे।
महत्व: यदि भारत इस मिशन में सफल होता है, तो यह चंद्रमा से नमूने वापस लाने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इसके अलावा, यह सफलता भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशन (गगनयान के बाद का चरण) के लिए आधार तैयार करेगी।
यह प्रस्तावित लैंडिंग साइट चंद्रयान-3 के प्रसिद्ध ‘शिव-शक्ति पॉइंट’ से अधिक दूर नहीं है, जो इस क्षेत्र की वैज्ञानिक महत्ता को और बढ़ाता है।
















