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महाराष्ट्र में भाषा नीति पर बोले CM फडणवीस : “मराठी ही सर्वोच्च, अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान”

मुंबई (एजेंसी)। महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही लंबी बहस के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में केवल मराठी भाषा की अनिवार्यता रहेगी, जबकि अन्य भाषाओं को सीखने के लिए छात्र स्वतंत्र होंगे।

मुख्य बिंदु: मुख्यमंत्री के संबोधन के प्रमुख अंश

सतारा में आयोजित 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने भाषाई नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उनके भाषण की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

मराठी की अनिवार्यता: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की आधिकारिक और अनिवार्य भाषा केवल मराठी है। किसी भी अन्य भाषा को जबरन थोपा नहीं जाएगा।

तीन-भाषा सूत्र पर स्पष्टीकरण: उन्होंने कहा कि विवाद भाषा को लेकर नहीं, बल्कि उसे लागू करने के समय को लेकर था। छात्र अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा चुन सकते हैं।

हिंदी अनिवार्यता का विरोध: पूर्ववर्ती महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पहली कक्षा से हिंदी अनिवार्य करने का प्रस्ताव था, जिसका भारी विरोध हुआ। फिलहाल इस विषय की समीक्षा के लिए नरेंद्र जाधव समिति का गठन किया गया है।

विदेशी बनाम भारतीय भाषाएं: फडणवीस ने कहा कि हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का स्वागत करते हैं, लेकिन अपनी ही भारतीय भाषाओं का अनादर करना सही नहीं है। सभी भारतीय भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष राज्य सरकार ने पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पेश करने का विचार किया था। हालांकि, व्यापक स्तर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह छात्रों को भाषा चयन की स्वतंत्रता देने के पक्ष में है।

“महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य है। हम अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के प्रति सकारात्मक हैं, लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करना अनुचित है।” — देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री

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