कर्तव्य पथ पर दिखा छत्तीसगढ़ का शौर्य : जनजातीय नायकों की गौरवगाथा का प्रदर्शन

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से वैश्विक मंच पर अमिट छाप छोड़ी। इस वर्ष राज्य की झांकी का विषय “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” रखा गया था, जो पूरी तरह से देश के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और साहस को समर्पित थी।
डिजिटल संग्रहालय की झलक
इस झांकी के माध्यम से नवा रायपुर (अटल नगर) में निर्मित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का प्रदर्शन किया गया। यह संग्रहालय अत्याधुनिक तकनीक के जरिए भारत के 14 प्रमुख जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियों को संजोए हुए है। उल्लेखनीय है कि इस डिजिटल गैलरी का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
झांकी के मुख्य आकर्षण
झांकी ने जनजातीय समाज के अदम्य साहस को दो प्रमुख क्रांतिकारियों के माध्यम से दर्शाया:
अग्र भाग: यहाँ 1910 के प्रसिद्ध ‘भूमकाल विद्रोह’ के सूत्रधार वीर गुंडाधुर की वीरता को प्रदर्शित किया गया।
पृष्ठ भाग: यहाँ छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए युद्ध कौशल दिखाते हुए चित्रित किया गया।
दर्शकों की सराहना
जब यह झांकी कर्तव्य पथ से गुजरी, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम गणमान्य अतिथियों ने करतल ध्वनि से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। झांकी के साथ चल रहे लोक नर्तकों के पारंपरिक नृत्य ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़िया ऊर्जा से भर दिया। यह झांकी न केवल एक कलात्मक प्रस्तुति थी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान और उसके गौरवशाली इतिहास का सशक्त प्रमाण भी रही।
















