स्वच्छ जल का संकट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी, इंदौर की घटना पर बड़ा एक्शन

इंदौर (एजेंसी)। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से उपजी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को इंदौर में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराना सरकार का सबसे पहला कर्तव्य है और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली कोताही को अक्षम्य माना जाएगा।
प्रमुख निर्देश और आगामी कार्रवाई
जवाबदेही तय होगी: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच जारी है। जैसे ही विस्तृत रिपोर्ट आएगी, उन सभी अधिकारियों और एजेंसियों पर गाज गिरेगी जिनकी लापरवाही से जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ हुआ है।
मौके पर रहेंगे उच्चाधिकारी: जल आपूर्ति और ड्रेनेज व्यवस्था को तुरंत पटरी पर लाने के लिए अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन) संजय दुबे को इंदौर में ही रहकर कमान संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
ढांचागत सुधार: इंदौर नगर निगम को पर्याप्त बजट, स्टाफ और तकनीकी संसाधन दिए जाएंगे ताकि पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदला जा सके।
भागीरथपुरा की वर्तमान स्थिति
बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो-तीन दिनों में युद्ध स्तर पर कार्रवाई की गई है:
व्यापक स्क्रीनिंग: स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र के 40,000 से अधिक लोगों की जांच की है।
मरीजों का उपचार: लगभग 2,456 लोगों में संक्रमण के लक्षण मिले। वर्तमान में 162 मरीजों का उपचार जारी है, जबकि 50 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था: जब तक पाइपलाइन पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाती, तब तक टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
समन्वय और सेवा की सराहना
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और डॉक्टरों की टीम की सराहना की, जिन्होंने इस आपात स्थिति में दिन-रात काम किया। उन्होंने स्वयं अस्पतालों का दौरा कर मरीजों का हाल जाना और आश्वस्त किया कि सभी की स्थिति स्थिर है।
बैठक में उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण बैठक में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
















