मध्य प्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को मुख्यधारा के रोज़गार से जोड़ें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को रोज़गार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर उचित समाधान खोजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मध्य प्रदेश से प्राप्त होने वाले तेंदूपत्ते के कारण पश्चिम बंगाल में बीड़ी उद्योग फलता-फूलता है और वहाँ के लोगों को रोज़गार मिलता है। अब राज्य सरकार का लक्ष्य है कि तेंदूपत्ता इकट्ठा करने वाले और बीड़ी बनाकर अपना जीवन यापन करने वाले हज़ारों परिवारों को रोज़गार की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि तेंदूपत्ता मध्य प्रदेश की संपत्ति है, और इससे उत्पन्न होने वाला रोज़गार यहीं के लोगों को मिलना चाहिए। बीड़ी श्रमिकों को एक बार फिर से सम्मानजनक रोज़गार से जोड़ा जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश सोमवार को खजुराहो में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।
डॉ. यादव ने कहा कि बीड़ी बनाने वाले परिवारों के लिए लगातार और बेहतर काम सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं के रोज़गार और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही उनकी मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, और आवश्यक सुविधाओं में भी सुधार किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि तेंदूपत्ता आधारित बीड़ी उद्योग से जुड़ा हर परिवार सम्मानजनक और स्थायी आय अर्जित करे। राज्य की वन उपज का लाभ अब सीधे हमारे ही श्रमिकों को मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह पहल उन परिवारों के जीवन में रोशनी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो वर्षों से तेंदूपत्ता संग्रहण और बीड़ी निर्माण से जुड़े रहकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की उपलब्धियाँ
विभाग ने राज्य में निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है:
निवेश प्रस्ताव: जीआईएस और आरआईसी के माध्यम से ₹12.70 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उत्पादन एवं रोज़गार: पिछले दो वर्षों में 327 एमएसएमई और बड़ी इकाइयों में उत्पादन शुरू हुआ है, जिससे 40,516 रोज़गार के अवसर सृजित हुए।
वित्तीय सहायता: उद्योगों को ₹4,977 करोड़ की सहायता और सुविधाएँ वितरित की गईं।
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): BRAP 2024 में चार श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में शीर्ष प्रदर्शन किया गया।
अनुपालन सरलीकरण: 108 अपराध-मुक्त अनुपालनों से अदालतों का बोझ कम हुआ है, और 2700 से अधिक अनुपालनों को सरल या कम किया गया है।
निवेश संबंधी प्रगति
भूमि आवंटन: ₹2.48 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिससे 2.85 लाख रोज़गार सृजित होने की संभावना है।
निर्माण कार्य: 229 इकाइयों में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिससे 81,206 रोज़गार संभावित हैं।
समिति द्वारा समाधान: साधिकार समिति द्वारा 105 मामलों का त्वरित समाधान किया गया।
कस्टमाइज्ड पैकेज: ₹18,685 करोड़ के 43 प्रोजेक्ट्स को कस्टमाइज्ड पैकेज स्वीकृत किए गए, जिससे 21,835 रोज़गार संभावित हैं।
औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास
नए औद्योगिक पार्क: 26 नए औद्योगिक पार्क और क्लस्टर (4000 हेक्टेयर) स्वीकृत किए गए हैं।
पीएम मित्रा पार्क: इसके लिए 873 हेक्टेयर भूमि स्वीकृत की गई है।
मोहासा बबई आरई पार्क: प्रथम चरण में 884 एकड़ और द्वितीय चरण में 750 एकड़ का विकास किया जा रहा है।
क्षेत्रीय उन्नयन: 33 औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन (अपग्रेडेशन) के लिए ₹536 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
वर्किंग वुमन हॉस्टल: 4 वर्किंग वुमन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 5772 बेड है।
निवेश प्रोत्साहन और राज्य की छवि निर्माण
जीआईएस 2025: प्रदेश का सबसे बड़ा निवेश शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
कार्यक्रम और संवाद: 72 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेश कार्यक्रम तथा 8 क्षेत्रीय और 15 राष्ट्रीय संवाद-सत्र आयोजित किए गए।
नीतिगत एवं आईटी आधारित सुधार
नई नीतियाँ: उद्योग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात की 3 नई नीतियाँ लागू की गईं।
पोर्टल सुविधाएँ: इंवेस्ट पोर्टल के माध्यम से निवेशकों के जीवन चक्र को समर्थन दिया जा रहा है।
प्रणाली लागू: फेसलेस नो क्वेरी इंसेंटिव प्रणाली और जीआईएस आधारित ऑनलाइन भूमि आवंटन तथा नो योर अप्रूवल सुविधा लागू की गई है।
संस्थागत विकास
नए कार्यालय: 5 नए क्षेत्रीय कार्यालय और कोयंबटूर (तमिलनाडु) में एक व्यापार विस्तार कार्यालय स्थापित किया गया है।
निवेश केंद्र: प्रत्येक जिला कलेक्टर कार्यालय में एक निवेश केंद्र स्थापित किया गया है।
महिलाएँ: महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है।
औद्योगिक और निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना
प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य को वैश्विक निवेश गंतव्य बनाने के लक्ष्य के साथ औद्योगिक एवं निर्यात संवर्धन की एक व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है:
आर्थिक लक्ष्य: वर्ष 2028-29 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ₹25.3 लाख करोड़ तक ले जाने और निर्यात को ₹1 लाख करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लॉजिस्टिक्स: व्यापार सुगमता के लिए आधुनिक, कम लागत वाला और सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
निर्यात को बढ़ावा: प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी भागों में इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किए जा रहे हैं।
निजी प्रोत्साहन: लॉजिस्टिक्स के बुनियादी ढांचे के विकास में निजी डेवलपर्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और राज्य लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार किया जा रहा है।
एफडीआई आकर्षण: अमेरिका, जापान और यूके जैसे लक्षित बाज़ारों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रदेश औद्योगिक और निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सके।
















