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दिल्ली शराब नीति मामला : केजरीवाल और सिसोदिया को बड़ी राहत, सीबीआई की दलीलें अदालत में खारिज

नई दिल्ली (एजेंसी)। राजधानी के बहुचर्चित आबकारी मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में क्लीन चिट दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार के आपराधिक षड्यंत्र को साबित करने के लिए पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

हालांकि, यह राहत केवल सीबीआई के मामले तक सीमित है। केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिलहाल कोई छूट नहीं मिली है। सीबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह विशेष अदालत के इस निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी।

कानूनी प्रक्रिया और अदालत का रुख

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने इस मामले पर लंबी बहस के बाद 12 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपियों को आरोप मुक्त (Discharge) कर दिया।

जांच एजेंसी का पक्ष: सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि “साउथ लॉबी” ने शराब नीति को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी।

बचाव पक्ष का तर्क: केजरीवाल और सिसोदिया के वकीलों ने दलील दी कि जांच एजेंसी के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केजरीवाल का नाम शुरुआती जांच में नहीं था, बल्कि बाद में पूरक चार्जशीट के जरिए जोड़ा गया।

मामले की पृष्ठभूमि: क्या है यह विवाद?

विवाद की जड़ 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति है, जिसे कोविड काल के दौरान लागू किया गया था। उपराज्यपाल की सिफारिश पर सीबीआई ने अगस्त 2022 में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। भारी विवाद के बाद सरकार ने इस नीति को रद्द कर दिया था।

वर्तमान में दो एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं:

CBI: नीति बनाने और लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं की जांच।

ED: इस नीति के माध्यम से हुए कथित अवैध धन के लेन-देन (मनी लॉन्ड्रिंग) की जांच।

“सत्य की जीत हुई है। शुरू से ही यह मामला राजनीति से प्रेरित था और आज अदालत के फैसले ने हमारी ईमानदारी पर मुहर लगा दी है।”
— अरविंद केजरीवाल, पूर्व मुख्यमंत्री (फैसले के बाद)

आगे क्या होगा?

भले ही ट्रायल कोर्ट से आरोपियों को राहत मिल गई हो, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। सीबीआई अब हाईकोर्ट में अपील दायर करने की तैयारी कर रही है, जिससे यह मामला एक बार फिर उच्च न्यायपालिका के विचाराधीन होगा।

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