मध्यप्रदेश

बुंदेलखंड में शिक्षा क्रांति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर को दी ‘ज्ञानवीर विश्वविद्यालय’ की सौगात

सागर (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर प्रवास के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विकास और शिक्षा के नए द्वार खोले। मुख्यमंत्री ने यहाँ नवनिर्मित ज्ञानवीर विश्वविद्यालय का भव्य शुभारंभ किया और क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक तकनीक व कौशल से जुड़ने का आह्वान किया।

भारत: एआई और आधुनिक तकनीक का वैश्विक नेतृत्वकर्ता

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही तक्षशिला और नालंदा जैसे संस्थानों के माध्यम से विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। डॉ. यादव ने कहा, “हमारे युवाओं का सामर्थ्य और कौशल आज भारत को तकनीक की दुनिया में नंबर वन बना रहा है।”

श्रद्धा और ज्ञान का संगम: ज्ञानवीर विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री ने इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयासों की सराहना की।

नाम का महत्व: यह संस्थान मंत्री श्री राजपूत द्वारा अपने माता-पिता (माता ज्ञानबाई और पिता वीर सिंह) को समर्पित एक श्रद्धांजलि है।

शैक्षणिक विरासत: डॉ. हरि सिंह गौर की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह विश्वविद्यालय क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर प्रदान करेगा।

लाइब्रेरी की सौगात: मुख्यमंत्री ने राहतगढ़ और जेसीनगर में श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए अत्याधुनिक लाइब्रेरी (ग्रंथालय) बनाने की घोषणा भी की।

प्रायोगिक शिक्षा पर जोर: ‘मूट कोर्ट’ का अवलोकन

विश्वविद्यालय परिसर के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने विधि (Law) के छात्रों के लिए तैयार की गई ‘मूट कोर्ट’ का विशेष रूप से अवलोकन किया।

मूट कोर्ट क्या है? > यह एक कृत्रिम अदालत होती है जहाँ कानून के छात्र वास्तविक अदालती कार्यवाही का अभ्यास करते हैं। इससे उनमें तर्क करने की क्षमता, कानूनी बारीकियों की समझ और भविष्य में उच्च न्यायालयों व उच्चतम न्यायालय में पैरवी करने का आत्मविश्वास विकसित होता है।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव ही एक सफल अधिवक्ता की नींव रखता है।

बुंदेलखंड का विकास और सांस्कृतिक गौरव

मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड को वीरों की भूमि बताते हुए महाराजा छत्रसाल और आल्हा-ऊदल के शौर्य को याद किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया:

विशेष पैकेज: खजुराहो कैबिनेट में बुंदेलखंड के लिए 27,000 करोड़ रुपये के विकास पैकेज को मंजूरी दी गई है।

रोजगार: भारी निवेश के माध्यम से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

खेल: भारतीय खिलाड़ियों की वैश्विक उपलब्धियों और क्रिकेट में विश्व विजेता बनने पर उन्होंने हर्ष व्यक्त किया।

बुंदेली खान-पान और ‘वोकल फॉर लोकल’

कार्यक्रम के दौरान डॉ. यादव ने पारंपरिक बुंदेली व्यंजनों का आनंद लिया। उन्होंने मोटे अनाज (Millets) जैसे ज्वार, बाजरा और मक्का की महत्ता बताते हुए कहा कि यह न केवल सेहत के लिए वरदान हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी हैं। थाली में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों जैसे—महेरी, बिजोरे, और चने की भाजी की उन्होंने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

सागर अब उन गिने-चुने शहरों में शामिल हो गया है जहाँ केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ अब अत्याधुनिक निजी विश्वविद्यालय की सुविधा भी उपलब्ध है। यह समावेशी विकास बुंदेलखंड के सुनहरे भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।

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