आरबीआई की सख्ती का असर : डॉलर के मुकाबले रुपये में 128 पैसे का बड़ा उछाल

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उठाए गए कड़े कदमों के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने शानदार वापसी की है। सोमवार को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 128 पैसे की मजबूती के साथ 93.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता रोकने के लिए केंद्रीय बैंक के नए नियमों ने रुपये को यह संजीवनी दी है।
आरबीआई का मास्टरस्ट्रोक: क्या है नया नियम?
रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई ने बैंकों के लिए ‘ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन’ (NOP) की सीमा को घटाकर 100 मिलियन डॉलर कर दिया है।
NOP क्या है? यह वह अधिकतम सीमा है जिसके तहत कोई बैंक एक कार्यदिवस की समाप्ति के बाद विदेशी मुद्रा में रिस्क (जोखिम) रख सकता है।
असर: आरबीआई के 27 मार्च के सर्कुलर के बाद बैंकों को अपनी लंबी डॉलर होल्डिंग्स को कम करना होगा। इसके परिणामस्वरूप बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ी, जिससे रुपये की वैल्यू में सुधार हुआ। बैंकों को इन नए नियमों का पालन 10 अप्रैल तक सुनिश्चित करना है।
बाजार का हाल: रिकॉर्ड गिरावट के बाद रिकवरी
पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में रुपया 94.85 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, सोमवार को इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट खुलते ही सकारात्मक रुख दिखा:
शुरुआती स्तर: 93.62 प्रति डॉलर
उच्चतम स्तर: 93.57 प्रति डॉलर
विशेषज्ञों की चेतावनी: क्या यह मजबूती टिकी रहेगी?
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबरी के अनुसार, वर्तमान में रुपये में दिखी यह तेजी बुनियादी आर्थिक सुधार के बजाय तकनीकी बदलावों (बैंकों द्वारा डॉलर बेचे जाने) के कारण है। अल्पावधि में तो राहत मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में कुछ चुनौतियां बरकरार हैं:
मजबूत डॉलर इंडेक्स: डॉलर इंडेक्स अभी भी 100 के पार है, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा के दबदबे को दर्शाता है।
कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए डॉलर की मांग बढ़ाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव आता है।
शेयर बाजार में गिरावट: घरेलू बाजार में भी भारी बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स करीब 1,191 अंक टूटकर 72,391 पर आ गया, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को बाजार से 4,367 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की।
















