शिक्षा में ‘भारतीय दृष्टि’ और नवाचार : मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया नई पुस्तकों और ‘फसल केयर ऐप’ का विमोचन

भोपाल (एजेंसी)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने हाल ही में भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत की समृद्ध शैक्षिक विरासत को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था, लेकिन एक दौर ऐसा भी आया जब साजिश के तहत भारतीयों में अपनी ही संस्कृति के प्रति हीन भावना भरने की कोशिश की गई। श्री परमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम उस मानसिक दासता से मुक्त होकर अपनी जड़ों पर गर्व करें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत
मंत्री श्री परमार ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत को फिर से उसके गौरवशाली अतीत से जोड़ने का एक माध्यम है। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
पुनर्निर्माण का अवसर: शिक्षा नीति के माध्यम से हम अपने पूर्वजों के ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में ढालकर राष्ट्र निर्माण कर सकते हैं।
भारतीय ज्ञान का समावेश: पाठ्यक्रमों में भारतीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि छात्र समाज की समस्याओं का मौलिक समाधान निकाल सकें।
संकल्प 2047: स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लक्ष्य में हर नागरिक और विद्यार्थी की भागीदारी अनिवार्य है।
शैक्षिक उपलब्धियों और नवाचारों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान मंत्री जी ने संस्थान के शिक्षकों और छात्रों द्वारा किए गए शैक्षणिक कार्यों की सराहना की और कई महत्वपूर्ण कृतियों का विमोचन किया:
अनुसंधान पुस्तकें: ‘एकेडेमिया-इण्डस्ट्रीज रिसर्च इन्टरफेस-3’ के तहत तैयार की गई विशेष पुस्तक का विमोचन हुआ। इसके साथ ही अक्टूबर 2025 में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (ICET Plus-2025) के व्याख्यानों के संकलन को भी जारी किया गया।
फसल केयर ऐप: कृषि विभाग के छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर एक अनूठा ‘फसल केयर ऐप’ विकसित किया है। यह ऐप फसलों की बीमारियों की पहचान करने और उनके जैविक व रासायनिक उपचार बताने में सक्षम है।
संस्थान गान: संस्थान के स्टाफ और छात्रों द्वारा रचित ‘संस्थान गान’ की सुमधुर प्रस्तुति दी गई, जिसे उपस्थित जनसमूह ने काफी सराहा।
जैविक उत्पाद: छात्रों द्वारा तैयार किए गए जीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन कर मंत्री जी ने युवाओं के नवाचारी प्रयासों का उत्साहवर्धन किया।
“विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने कौशल का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करना चाहिए।” — इंदर सिंह परमार
इस अवसर पर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के निदेशक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष (जैसे डॉ. रूचिरा चौधरी, डॉ. अंजलि आचार्य, डॉ. अजय कुमार भारद्वाज) और बड़ी संख्या में प्राध्यापक व छात्र उपस्थित थे।
















